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दो हजार बच्चों को दी थी अमानक दवा

6 वर्ष पहले
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अमानकदवाओं के बारे में जानकारी मांगते हुए नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे ने जानना चाहा था कि क्या मरीजों को अमानक दवा बांटी गई थी। इस सवाल के जवाब में स्वास्थ्य विभाग ने सच को छिपा लिया। विभाग ने किसी भी अमानक दवा के उपयोग से साफ इनकार कर दिया।

पांच सालों में प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग में सप्लाई की गई कुल दवाओं में से अमानक दवाओं की जानकारी चाही गई थी। इसके जवाब में विभाग का कहना है कि एक भी अमानक दवा बीते वर्षों में सामने नहीं आई, तो कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई का सवाल ही नहीं उठता है। इस मामले में जब डीबी स्टार ने पड़ताल की तो सनसनीखेज जानकारी हाथ लगी। इसमें पता चला कि पिछले साल इंदौर के चाचा नेहरू अस्पताल में करीब 2000 से ज्यादा बच्चों को अमानक दवा दी गई थी। काटरिमैक्सजोन नामक दवा चाचा नेहरू अस्पताल सहित हेल्थ विभाग में भी सप्लाई की गई थी। यह दवा बच्चों को देने के बाद फूड एंड ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट द्वारा करवाए गए लैब टेस्ट में इसके अमानक होने की बात सामने आई थी, जिसकी जानकारी विभागाध्यक्ष सहित संबंधितों को दे दी गई थी। लेकिन मामले में खानापूर्ति कर फाइल बंद कर दी गई। अब फूड एंड ड्रग कंट्रोल विभाग की टेस्ट के बाद फिर फाइल खुली है।

विभागाध्यक्षने भी स्वीकारा

इसमामले में भले ही विभाग जानकारी छिपा रहा हो, मगर चाचा नेहरू अस्पताल के विभागाध्यक्ष डॉ. शरद थोरा से डीबी स्टार ने बात की तो उन्हें भी स्वीकार करना पड़ा कि पिछले साल टेस्ट रिपोर्ट में काटरिमैक्सजोन नामक अमानक दवा का पता चला था।