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कई बातें पता नहीं थीं पुलिसकर्मियों को

6 वर्ष पहले
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आमतौरपर जब कोई बाल अपराधी बाल संप्रेषण गृह से भाग जाता है तो उसके खिलाफ पुलिस की तरफ से धारा 224 लगा दी जाती है। जबकि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में स्पष्ट उल्लेख है कि भागने वाले बच्चे पर अलग से कोई धारा नहीं लगाई जाए। हां, यदि बच्चा भागने के बाद कोई अपराध करता है तो उस मामले में धारा लगाई जा सकती है। इसी प्रकार जब कोई व्यक्ति थाने जाकर बाल अपराधी की जानकारी मांगता है तो पुलिस को सीधे उस विषय में कोई भी जानकारी देने का अधिकार नहीं है। इसके लिए पूछताछ करने वाले व्यक्ति को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड से अनुमति मांगना जरूरी है। दरअसल जस्टिस बोर्ड द्वारा बाल अपराधी की समस्त जानकारी नष्ट कर दी जाती है, ताकि उसे भविष्य में नौकरी करने में कोई दिक्कत नहीं आए। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि जब कोई बाल अपराधी पकड़ा जाता है तो उसे पुलिस थाने में रखने के बजाय स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट को सौंपा जाना चाहिए। पुलिसकर्मियों ने बताया कि यहां ऐसी जानकारी मिली है जो भविष्य में काम आएगी।