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मनुष्य की सबसे बड़ी बाधा है उसका संशय: अवधेशानंद जी

6 वर्ष पहले
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मनुष्यकी सबसे बड़ी बाधा उसका संशय है। यह संशय अज्ञानता के कारण होता है। इससे पार पाने के लिए चित्त को साधना एकाग्रता की जरुरत होती है। एकाग्रता ही जीवन में प्रत्येक कार्य की सफलता की कुंजी है। यह बातें जूनापीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद महाराज ने कहीं। वे रविवार को रवींद्र भवन के मुक्ताकाश मंच से सत्संग समिति द्व‌ारा आयोजित श्रीमद भागवत कथा के शुभारंभ पर प्रवचन दे रहे थे।

उन्होंने कहा कि भौतिकता का तिलिस्म टूटने पर ही हम परम आनंद प्राप्त कर सकते हैं। कथा और उसके प्रसंगों के माध्यम से समय और जीवन प्रबंधन के उपाय भी बताए। प्रारंभ में समिति के अध्यक्ष अजय सिंह, गृह मंत्री बाबूलाल गौर, पुलिस महानिदेशक सुरेंद्र सिंह, डॉ. महेंद्र सिंह चौहान पूर्व महापौर मधु गार्गव ने स्वामी अवधेशानंद जी का स्वागत किया। सोमवार को कथा शाम सात बजे प्रारंभ होगी।

मानसनगरी है भोपाल

उन्होंनेकहा कि मध्यप्रदेश की भूमि इतनी पावन है कि यहां से देवों ने भी बहुत कुछ लिया है। श्रीकृष्ण ने दुनिया को जो ज्ञान दिया, वह उन्हें उज्जयनि से ही मिला था। विक्रमादित्य, कालीदास के अलावा कई अन्य महान लोग मप्र के ही थे। योग के जनक पतंजलि भोपाल के पास गोंदरमऊ के थे। यह शहर मानस नगरी है।

रवींद्र भवन के मुक्ताकाश मंच से कथा सुनाते अवधेशानंद महाराज।