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िफलहाल टली समान जांच समान फीस की व्यवस्था
नर्सिंगहोम्स में सीनियर और जूनियर डॉक्टरों की फीस एक समान करने को लेकर हो रहे विरोध के बाद सेंट्रल क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट अटक गया है। एक्ट में नर्सिंग होम्स में कार्यरत डॉक्टरों की फीस उनके अनुभव को दरकिनार कर, योग्यता (डिग्री) के हिसाब से तय करने का प्रावधान किया गया था। नर्सिंग होम्स में कार्यरत सीनियर डॉक्टर इसका विरोध कर रहे थे। इसके चलते नेशनल काउंसिल फॉर क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट ने एक्ट में संशोधन की शुरुआत कर दी है। इसके लिए काउंसिल ने सभी राज्यों के स्वास्थ्य संचालकों से एक्ट के नए मसौदे पर सुझाव मांगे हैं।
समानिडग्री नहीं है पैमाना
काउंसिलके अधिकारियों ने बताया कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन बीते दो साल से प्राइवेट अस्पताल और नर्सिंग होम्स में समान जांच की समान फीस व्यवस्था लागू करने का विरोध कर रही है। उसका तर्क है कि केवल समान डिग्री समान होने के कारण सीनियर और जूनियर डॉक्टरों की फीस एक समान तय नहीं की जा सकती। अस्पतालों में होने वाली मेडिकल जांच आैर पैथालॉजी जांच की संख्या और तरीका एक जैसा होने के आधार पर मेडिकल जांच की फीस एक समान तय करना गलत है। इसके अलावा एसोसिएशन ने काउंसिल से एलोपैथिक, आयुर्वेदिक, होम्योपैथी सहित अन्य पैथियों के नर्सिंग होम के मानक अलग-अलग तय करने की मांग की थी। इसके चलते काउंसिल ने सेंट्रल क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट को देश में लागू करने पर फिलहाल रोक लगा दी है।
अस्पतालोंको चार श्रेणियों में बांटने के तय हों मानक
मध्यप्रदेशमेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. ललित श्रीवास्तव ने बताया कि एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में अभी अस्पतालों को चार अलग- अलग श्रेणियों में बांटने के नियम स्पष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि इस कारण इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हॉस्पिटल्स को श्रेणियों में बांटने के नियमों का विरोध कर रही थी। काउंसिल नियमों का संशोधित ड्राफ्ट अगले महीने जारी करेगी।
> नर्सिंग होम में उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं और वहां काम कर रहे डॉक्टरों की योग्यता के आधार पर संस्था को चार अलग - अलग वर्गों में बांटा जाएगा।
> एक श्रेणी के दो अलग - अलग अस्पतालों में विभिन्न बीमारियों की जांच की फीस समान होगी।
> सेंट्रल क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत नर्सिंग होम, क्लीनिक हॉस्पिटल की रजिस्ट्रेशन फीस बढ़ाई जाए।
> नर्सिंग होम और क