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भोपाल समेत तेरह जिलों में फिर से होगा पंचायतों का परिसीमन
भोपालऔर इंदौर समेत तेरह नगर निगमों नगर पालिकाओं की सीमा बढ़ाए जाने से इन जिलों की पंचायतों (ग्राम, जिला और जनपद) का परिसीमन गड़बड़ा गया है। अब नए सिरे से या तो नई पंचायतों का गठन होगा या परिसीमन किया जाएगा। इसके लिए इन जिलों को विशेष अनुमति दी गई है। साथ ही कलेक्टरों से कहा गया है कि वे जल्द से जल्द वार्डों के परिसीमन की कार्यवाही पूरी करें।
गौरतलब है कि अप्रैल-मई 2014 में पंचायतों का परिसीमन पूरा हो गया था, लेकिन हाल ही में नगरीय निकायों में कुछ ग्राम पंचायतें तथा उनके गांव शामिल हो गए हैं। इससे नगर निगम की सीमा से सटे कुछ गांव ऐसे रह गए हैं, जो तो अब किसी दूसरी ग्राम पंचायत के हिस्से हैं और ही नगरीय निकाय की सीमा में शामिल हो पाए। इस कारण फिर से परिसीमन के हालात बने। इस स्थिति के चलते पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सभी कलेक्टरों से कहा कि जल्द से जल्द इस कार्यवाही को पूरी करके शासन को अवगत कराएं। गांव की आबादी के मान से यदि पृथक से ग्राम पंचायत बनाई जा सकती है तो तत्काल नई ग्राम पंचायत का गठन किया जाए। यदि इतनी आबादी नहीं है तो उसे किसी दूसरी (पड़ोस की) ग्राम पंचायत में शामिल करने के लिए परिसीमन कर दिया जाए। इसी तरह जिला या जनपद पंचायत से कुछ गांव अलग हो गए हैं तो उनके निर्वाचन क्षेत्र का भी परिसीमन किया जाए। आबादी की गणना वर्ष 2011 की जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर की जाएगी।
पंचायतों में आरक्षण की कार्यवाही 10 नवंबर तक पूरी होगी
पंचायतएवं ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायतों के आरक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग की अपर मुख्य सचिव अरुणा शर्मा ने जिला पंचायत के सीईओ को पत्र लिखकर कहा है कि वे अक्टूबर तक इस काम को पूरा कर लें। जिला पंचायतों के अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण का निर्णय 10 नवंबर तक राज्य स्तर पर होगा।
ये जिले हुए प्रभावित
नगरीयनिकायों के विस्तार से प्रभावित होने वाले जिलों में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, छिंदवाड़ा, विदिशा, होशंगाबाद, मुरैना, मंदसौर, राजगढ़, बालाघाट, नरसिंहपुर, सतना आदि हैं।