बेसहारा बच्चों का संवरेगा भविष्य
शहरमें भीख मांगने, पन्नी बिनने वाले और खेल तमाशा- दिखाने वाले बच्चों को अच्छी शिक्षा, भोजन और आवास की सुविधा मिल सकेगी। इसके लिए भोपाल जिले में खुले आश्रयगृह शुरू किए जा रहे हैं। इनको संचालित करने के लिए एनजीओ से प्रस्ताव भी आमंत्रित कर लिए गए हैं। इनका परीक्षण कर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। सबकुछ अच्छा रहा तो कुछ ही महीने में खुले आश्रयगृह की सुविधा बच्चों को मिलने लगेगी। इनका उद्देश्य ऐसे बच्चों के लिए शिक्षा के अवसर की व्यवस्था करना है। साथ ही उनकी क्षमताओं एवं योग्यताओं को पहचानकर उनका विकास करना है। इसके अलावा देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को शिशुगृह/ बालगृह भेजा जाएगा। इन खुले आश्रयगृह में बच्चे 24 घंटे कभी भी सकते हैं। यहां पर उनके रहने-सोने, खाने की पूरी व्यवस्था रहेगी।
आकर्षितकरने के पूरे इंतजाम
यहांपर बच्चा दिन में आकर शाम को अपने घर जा सकेगा। 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए खेलने से लेकर उनकी पढ़ाई-लिखाई के भी इंतजाम होंगे। इनमें टीचर्स, केयर टेकर, चौकीदार सहित एक गृह पर 6 से 7 लोगों का स्टाफ रहेगा। शहर में जिला प्रशासन चयनित एनजीओ द्वारा खुले आश्रयगृह का संचालन किया जाएगा। बाल आश्रयगृह में बच्चे के एक बार प्रवेश लेने के बाद उसको उम्र के अनुसार शिक्षा दिलाई जाएगी। इसमें व्यावसायिक प्रशिक्षण, मनोरंजन, ब्रिज शिक्षा के लिए राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय कार्यक्रम के साथ अनुबंध कर शिक्षा की व्यवस्था करेंगे।