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हथियार डालने को मजबूर हो गए थे पाक सैनिक

7 वर्ष पहले
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संत हिरदाराम नगर भास्कर. भोपाल

बंग्लादेश मुक्ति युद्ध 1971 हथियारों से ज्यादा भारतीय फौज के जज्बे और साहस से जीता गया था। भौगोलिक परिस्थितियों के विपरीत होने के बाद भी हमारी फौज ने अपने युद्ध कौशल से दुश्मन के 93 हजार सैनिकों को हथियार डालकर सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया था।

छात्राओं को यह जानकारी सेवानिवृत्त कर्नल नारायण पारवानी ने 14 दिसंबर की गौरवगाथा पर आयोजित कार्यक्रम में दी। वह नवनिध में आयोजित शहीद सैनिकों के लिए हुई श्रद्धांजलि सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भौगोलिक कठिनाइयों के बाद भी हमारे सैनिकों ने पुराने हथियार होने के बाद भी साहस और जज्बे से विजय प्राप्त की थी। अमेरिकी परमाणु संपन्न बेड़े की हिंद महासागर में आने की सूचना पर दुगने उत्साह से भारतीय सैनिक आगे बढ़े और उसके पहुंचनें के पहले ही जनरल जगजीत सिंह अरोरा ने पाकिस्तानी लेटीनेट जनरल अमीर उदुल्लाह खान नियाजी एवं उनके 93000 सैनिकों से घुटने टिकवाएं। साथ ही जनरल नियजी से स्टेटमेंट ऑफ सरेंडर पर हस्ताक्षर करवा लिए।

विद्यालय के मैनेजमेंट इंचार्ज मनोहर वासवानी ने इस युद्ध के पूर्व के घटनाक्रम एवं बांग्लादेश की जटिल भौगोलिक परिस्थितियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा 1971 के युद्ध में पाकिस्तानी सेना से विश्व इतिहास का द्वितीय बड़ा आत्मसमर्पण करवा कर नवीन राष्ट्र बंगलादेश को भारतीय फौज ने उदित किया था। कार्यक्रम में विद्यालय प्राचार्य मनीष जैन ने छात्राओं को सैनिकों का समान राष्ट्र के लिये हाथ आगे बढ़ाने की प्रेरणा भी दी। कार्यक्रम में कर्नल पारवानी का समान भी किया गया। छात्राओं ने मौन रख अमर शहीदों के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।

कर्नल नारायण पारवानी बोलते हुए।

{बंगलादेश मुक्ति युद्ध 1971 को याद किया