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क्लास से गायब रहे 80% एमएलए

7 वर्ष पहले
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विधानसभामें आयोजित विधायक कम्प्यूटर प्रशिक्षण कार्यक्रम में 8 से 12 दिसंबर 2014 तक बमुश्किल 50 विधायकों ने ही उपस्थिति दर्ज कराई। यह प्रशिक्षण मप्र विधानसभा, मेपआईटी और एनआईसी के संयुक्त प्रयास से हो रहा था। डीबी स्टार ने पूर्व में इस ट्रेनिंग का खुलासा करते हुए 8 दिसंबर 2014 के अंक में \\\"टेक्नो फ्रेंडली बनेंगे एमएलए\\\' शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसी दिन से इनकी ट्रेनिंग भी शुरू हुई थी। पहले दिन ही थ्योरी क्लास में करीब 170 विधायक अनुपस्थित थे।

भोपालके विधायक माहिर

डीबीस्टार ने जाना आखिर क्या वजह रही कि इतने इंतजाम के बाद भी विधायक ट्रेनिंग में सम्मिलित क्यों नहीं हुए? ट्रेनिंग से जुड़े लोगों ने विधायकों की अरुचि पर अलग-अलग तर्क दिए। किसी ने कहा कि सदन की व्यस्तता के कारण ट्रेनिंग में नहीं जा पाए तो भोपाल के विधायकों ने जवाब दिया कि वे पहले से ही इन सबकी जानकारी रखते हैं। हालांकि इंदौर के विधायकों ने कम्प्यूटर प्रशिक्षण लेने में सबसे ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। वे थ्योरी प्रैक्टिकल दोनों क्लास में उपस्थित रहे।

जिन्हें जरूरत थी वे मौजूद थे

मैंतो सत्र की व्यस्तता के कारण ट्रेनिंग में नहीं जा पाया। वैसे भी मैं इंजीनियर होने के नाते इन सब बातों से वाकिफ हूं। लेकिन जिन्हें जरूरत थी वे विधायक ट्रेनिंग में मौजूद रहे। साथ ही हम यह प्रयास भी करेंगे कि कांग्रेस के सभी विधायक इस व्यवस्था से जुड़ें, ताकि ई-प्रश्न सेवा का लाभ लिया जा सके।

बालाबच्चन, उपनेताप्रतिपक्ष

उन्हें कम्प्यूटर चलाना आता होगा

विधानसभाद्वारा कराई गई ट्रेनिंग में शामिल होने के लिए कोई बाध्यता नहीं थी। जो लोग सीखना चाहें, उन्हें ही जाना था। हो सकता है कि जो नहीं शामिल हुए, उन्हें कम्प्यूटर चलाना आता होगा। फिर हम अपनी तरफ से प्रयास करेंगे कि सभी विधायक टेक्नो फ्रेंडली बनें, ताकि विधानसभा की ई-प्रश्न सेवा जल्दी शुरू हो सके।

नरोत्तममिश्रा, संसदीयकार्यमंत्री

विधायक राजेंद्र मेश्राम बने नंबर वन स्टूडेंट

पूरी ट्रेनिंग में शामिल विधायकों में से सिंगरौली जिले की देवसर विधानसभा क्षेत्र के विधायक राजेंद्र मेश्राम नंबर वन स्टूडेंट रहे। इन्होंने प्रत्येक दिन की गतिविधियों को केवल सीखा, बल्कि अपना अकाउंट सभी सोशल साइट्स पर भी बनाया। राजेंद्र मेश्राम ने बताया कि प्रशिक्षण के पहले वे कुछ नहीं जानते थ