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नहीं सुधरा वाटर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क

6 वर्ष पहले
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गैसपीड़ित बस्ती जयप्रकाश नगर के लोग कई समस्याओं से घिरे हैं। यहां लोगों को तो पीने का साफ मिल रहा है और ही अन्य मूलभूत सुविधाएं। घरों के बाहर से पानी भरने की दिक्कत तो खत्म हुई, लेकिन गंदे और मटमैले पानी की समस्या बनी हुई है। लोगों का कहना है कि ओवरहैड और संपटैंक के आसपास गंदगी का आलम है। इसके कारण गंदा पानी पहुंच रहा है। लिहाजा यहां व्यवस्था दुरुस्त करने की जरूरत है। रहवासियों का कहना है कि बस्ती के रहवासी अव्यवस्थाओं से जूझ रहे है। यहां की नालियां गंदगी से भरी हुई हैं। यहां सफाई के पुख्ता इंतजाम किए जाने की जरूरत है। यहां तो रोजाना साफ-सफाई हो रही है और ही स्ट्रीट लाइट जल रही हैं। नगर निगम के सफाई कर्मी यहां कभी कभार ही आते हैं। करीब डेढ़ हजार मकानों वाली इस बस्ती में अधिकांश परिवार गैस पीड़ित हैं। कुछ परिवार तो ऐसे हैं, जिन्हें मुआवजा भी नहीं मिला और वे प्रदेश सरकार से न्याय की आस लगाए हैं।

हकीकतकुछ और

जेपीनगर निवासी दीपक कुमार का कहना है कि सरकार ने गैस पीडितों के हित की बात तो बहुत की, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर है। नगर निगम द्वारा बस्ती की देखरेख करने की बात तो दूर घरों के बाहर से कचरा नहीं उठाया जा रहा है।

बीमार हैं कई परिवार

गैसहादसे से पीड़ित परिवार आज भी कई बीमारियों से घिरे हैं। रहवासी सुनील जैन का कहना है कि मामूली पैदल चलने पर ही उनकी श्वास फूलने लगती है। पिछले दस-बारह साल से वे नियमित दवा खा रहे हैं। बस्ती में कई बच्चे मानसिक शारीरिक रूप से कई रोगों से ग्रस्त हैं। जरूरत है तो उनके सही इलाज और पुनर्वास की।

कदमउठाए जाएं

पर्यावरणसुधार के लिए संघर्ष कर रहे है समाजसेवी हरिशंकर का कहना है कि यहां की हवा भी शुद्ध नहीं है। सामने की यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री है। इसमें कई टन रसायनिक कचरा है। इससे आसपास के इलाकों का वातावरण शुद्ध नहीं है। यूनियन कार्बाइड परिसर में रखे कचरे को हटाया जाए। सरकार क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को पर्यावरण सुधार के लिए कदम उठाने चाहिए।

^गैस पीड़ित बस्तियों में प्रदेश सरकार को व्यवस्थाएं सुधारने के लिए कारगर कदम उठाने चाहिए। सड़कें खराब हैं। पीने के पानी के इंतजाम ठीक नहीं हैं। बिजली के बेतरतीब खंभे दुर्घटना का कारण बने हुए हैं। गैस पीड़ित बस्तियों में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भी खोले जाएं और लोगों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण होना चाहिए। वर्तमान में बड़ी संख्या में लोग बीमारी से पीड़ित हैं। -सरलाविश्वकर्मा,जेपी नगर

^गैसपीड़ित बस्तियों में सबसे बड़ी जरूरत मूलभूत सुविधाओं की है। हाल ही में सड़कें और जल प्रदाय व्यवस्था पहले की तुलना में अब काफी सुधरी है। यहां के लोगों का जीवन स्तर ऊपर उठे और लोगों को रोजगार मुहैया हो इसके लिए प्रदेश सरकार को कारगर कदम उठाने की जरूरत है। -किरणदेशवाड़ी, जेपी नगर

जेपी नगर के पास बना संप टैंक के आसपास गंदगी का आलम है। यहां सुरक्षा और सफाई के इंतजाम नहीं हैं। जबकि बस्ती में बिजली के खंभों पर लाइटें नहीं लगी हैं।