किसान क्रेडिट योजना में भी गड़बड़ी मिली
प्रदेशमें किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना में भी गड़बड़ी की खबरें आने लगी हैं। इस योजना में मृतकों के नाम पर एक करोड़ रुपए के गबन के मामले में प्रदेश के आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) को जांच की अनुमति मिल गई है। किसान क्रेडिट कार्ड में यह गड़बड़ी यूं तो मुरैना में मिली है, लेकिन इसने योजना के प्रारूप पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। जो गड़बड़ी पाई गई, उसके अनुसार वर्ष 2007 से 2010 के बीच मुरैना की एक बैंक में मृतकों के बैंक खाते खोल उनके नाम पर एक करोड़ रुपए का लोन बांट दिया था। इस मामले में बैंक ने तत्कालीन ब्रांच मैनेजर को निलंबित कर जांच ईओडब्ल्यू को सौंप दी। ईओडब्ल्यू ने प्राथमिक जांच में अब इसकी जांच शुरू कर दी है।
किसान क्रेडिट कार्ड से पैसा लेने के लिए ऐसे लोगों के नाम किसान क्रेडिट कार्ड जारी कर दिए गए, जिनकी मौत 37 साल पहले हो चुकी है। फर्जी फोटो दस्तावेजों के आधार पर बैंक में अकाउंट खोले गए और इसी आधार पर लोन स्वीकृत कर दिया।
बंधक संपत्ति का भी कोई रिकॉर्ड नहीं
अकाउंट होल्डर द्वारा बैंक रिकॉर्ड में दर्ज बंधक संपत्ति का फिजिकल वेरीफिकेशन में कोई अस्तित्व नहीं है। इतना ही नहीं संपत्ति राजस्व के दस्तावेजों में भी दर्ज नहीं है।
प्रदेश के ही ग्राम हुसैनपुर निवासी खीची नारायणी (भाई-बहन) के नाम पर अकाउंट (2681008800002971) खोल एक लाख रुपए का किसान क्रेडिट कार्ड बनाकर रुपए निकाल लिए। इस अकाउंट में दस्तावेज फर्जी लगाए गए थे।
मुरैना के ग्राम दोनारी निवासी करन सिंह पंचम सिंह की मौत 37 साल पहले हो चुकी है। उनका बैंक अकाउंट (2681008800006816) खोला और किसान क्रेडिट कार्ड बनाकर सवा दो लाख रुपए निकाल लिए।