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सूनी आंखों में उम्मीदों के लिए एक नई पहल
इंदौरस्थित महेश दृष्टिहीन कल्याण संघ की बालिकाओं को पिछले दो माह से रिलायंस कम्यूनिकेशन कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) प्रोजेक्ट के तहत टेली कॉलर का प्रशिक्षण दे रही हैं। इन बालिकाओं को कर्मचारी बाकायदा रोजाना ट्रेनिंग देकर पेशेवर टेली कॉलर बना रहे हैं और करियर के नए रास्ते सुझा रहे हैंं। इतना ही नहीं पर्सनैलिटी डेवलपमेंट और स्पोकन इंग्लिश का नॉलेज भी उन्हें दिया जाता है। दृष्टिहीन लड़कियों को निराशा की सोच से बाहर लाने में और आत्मनिर्भरता पैदा करने के लिए 42 लड़कियों का इंटरव्यू लिया था। इनमें से 17 लड़कियों का चयन हुआ। इस आंकड़े को 50 से भी आगे ले जाने की कोशिश है। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली हर बालिका को औसत पचास कॉल करने होते हैं। हालांकि फिलहाल कम कॉल ही बिजनेस में कन्वर्ट हो पाते हैं, लेकिन कर्मचारियों के मुताबिक यह स्तर भी बालिकाओं की क्षमता से काफी ज्यादा है। इन बालिकाओं को अपनेपन के अहसास, उचित मार्गदर्शन और उन्हें घंटों की प्रैक्टिस देने के कारण आज संघ में संचालित यह ट्रेनिंग सेंटर सोशल सर्विस की नई मिसाल बनकर उभरा है।
मोबाइलएप बनाने की योजना
कंपनीने टेली कॉलिंग से जुड़ा सारा डाटा ब्रेल लिपि में बदलवाया है। काम को और सरल बनाने के लिए कंपनी कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर मोबाइल एप्लीकेशन बनाने पर भी काम कर रही है। इसमें एप इस शीट को पढ़कर कॉलर को सुना देगी।
कम्यूनिकेशनकी हर सीख
लड़कियांप्रोफेशनल टेली कॉलर की तरह बात कर सकें, इसलिए उन्हें रोजाना दो घंटे की ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें सॉफ्ट स्किल्स, कम्यूनिकेशन स्किल्स, कम्यूनिकेशन एटीकेट, टेली कम्यूनिकेशन इंडस्ट्री नॉलेज, प्रोडक्ट एंड प्रोसेस नॉलेज, स्पोकन इंग्लिश और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट जैसे अहम बिंदुओं का प्रशिक्षण शामिल है। बालिकाओं की मदद के लिए उनके साथ हर समय एक महिला कर्मचारी मौजूद रहती है। कस्टमर फीडबैक के आधार पर काम में सुधार कराया जाता है। केंद्र की छह बालिकाएं बीएड डिग्रीधारी हैं, वहीं तीन पोस्ट ग्रेज्युएशन कर रही हैं। चार लड़कियों ने पीजी कर लिया है। पांच ग्रेजुएट हैं। तीन लड़कियां बीए (म्यूजिक) की छात्रा हैं।
^आत्मविश्वास बढ़ा
टेलीकॉलिंग ट्रेनिंग ने हमें बोलना सिखाया। इससे हमारा आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा है। इससे हमें अपने पैरों पर खड़े होने में मदद मिली है, यहां का अनुभव आगे भी काफी मदद करेगा।
नीलमसिंह, प्रशिक्षु
^बिजनेस औररोजगार भी
इनलड़कियों को अवसर मिलने की जरूरत है। इससे हमें बिजनेस मिल रहा है और बालिकाओं को रोजगार। यहां की सीख भविष्य में काफी मदद देगी।
यशवंतसिंह, सीईओ,रिलायंस कम्यूनिकेशन
^15 से50 तक पहुंचाने की कोशिश
हमइन लड़कियों को नो प्रॉफिट-नो लॉस के तहत टेली कॉलर की ट्रेनिंग दे रहे हैं। हमारा मकसद इन्हें अपने पैरों पर खड़े होने लायक बनाना है। फिलहाल सेंटर में 15 लड़कियां हैं। हमारी कोशिश है कि इस आंकड़े को 50 तक पहुंचाया जाए। कॉल से मिलने वाली राशि सीधे लड़कियों को दे दी जाती है।
अनीताशर्मा, असिस्टेंटमैनेजर (ट्रेनिंग) रिलायंस कम्यूनिकेशन
सारणी की संध्या अंबुलकर ने एमफिल किया है। वे 16 वर्ष से महेश दृष्टिहीन कल्याण संघ का हिस्सा हैं। संध्या अब एक अच्छी टेली कॉलर भी हैं। पिछले डेढ़ माह की ट्रेनिंग के बाद वे आम पेशेवर टेली कॉलरों को भी मात दे रही हैं। उनके मन में हौसले का सूरज जगमगा रहा है।
सोनू चौहान (निवासी झाबुआ) के लिए टेली कॉलिंग की ट्रेनिंग ने मानो नई राहें खेल दी हैं। धाराप्रवाह उच्चारण, प्रोडक्ट से जुड़े हर सवाल का सटीक जवाब देने की काबिलियत देखते ही बनती है। संगीत में बीए सोनू के आत्मविश्वास को टेली कॉलिंग की ट्रेनिंग ने नई ऊंचाइयां दी हैं।