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मैंने तो बेटा खोया, आप बच्चों के दोस्त बनें

6 वर्ष पहले
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‘मैंनेतो अपना तेरह साल का बेटा खोया है, लेकिन चाहता हूं किसी और पिता को ऐसा दर्द सहना पड़े। अचानक बच्चा अकेला रहने लगे या बात-बात में उदास हो जाए, तो यह समझें कि उसे मां-बाप के रूप में अच्छे दोस्त की जरूरत है।’ यह कहते-कहते अब्दुल रज्जाक की आंखें भर आती हैं।

रज्जाक का बेटा मामून (कुक्कू) 13 साल का था, जब उसने कूलर पर चढ़कर फांसी लगा ली थी। घटना से सदमे में आए पिता रज्जाक डिप्रेशन में चले गए। चार साल बाद भी उनकी तबीयत ठीक नहीं रहती, लेकिन चाहते हैं कि जैसा उनके साथ हुआ, किसी और के साथ हो। इसलिए वे अलग-अलग परिवारों से मिलकर अपनी दास्तां सुनाते हैं। निराश डिप्रेशन में आए बच्चों की काउंसलिंग करते हैं। वे कहते हैं कि ऐसा कर सालभर के भीतर 15 लोगों को ऐसा कदम उठाने से रोका है।

रज्जाक बताते हैं कि मामून ने 19 जनवरी 2011 को घर में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। वे कहते हैं मामून उस वक्त भले ही सातवीं में पढ़ता था, लेकिन उसका दिमाग उम्र से कहीं आगे था। परिवार और कारोबार की जिम्मेदारियों के बीच हम समझ ही नहीं पाए कि बेटा कब और क्यों दूर चला गया? दूसरों की काउंसलिंग के लिए रज्जाक अब ‘आत्महत्या रोकथाम निवारण केंद्र’ नाम के एनजीओ का रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं। हालांकि, एनजीओ रजिस्टर्ड होने से पहले उन्होंने प|ी इंद्रा के साथ मिलकर उन लोगों को जागरुक करना शुरू कर दिया है, जो डिप्रेशन में हैं। वे अपने परिचितों से पूछकर ऐसे लोगों से मिलते हैं।

अब्दुल रज्जाक

दर्द से निकला जज्बा