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सर्दियों का मौसम और पुरानी यादें

7 वर्ष पहले
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‘सर्दियोंका फिर वही मौसम..।’ शायद इस आकर्षक शीर्षक की वजह से भारत भवन में गुरुवार को मंचित नाटक देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक अंतरंग सभागार पहुंचे। आशीष श्रीवास्तव के निर्देशन में रंग संस्था ‘चेतना सांस्कृतिक एवं जनकल्याण समिति’ के कलाकारों ने इस नाटक में अभिनय किया। भोपाल में इस नाटक का यह पहला मंचन था।

नाटकका स्टोरी प्लॉट

नईदिल्ली रेलवे स्टेशन पर 55 वर्षीय अभिनव की मुलाकात 54 साल की पूजा से होती है। स्वभाव से बातूनी अभिनव, पूजा से बात करना शुरू कर देता है। धीरे-धीरे दोनों में अच्छी बातचीत शुरू हो जाती है। ट्रेन लेट होने के कारण बातचीत का सिलसिला देर तक चलता रहता है। अचानक अभिनव को अस्थमा का अटैक आता है। इसके बाद बैग से इन्हेलर निकालते समय पूजा को अभिनव के बैग से कॉलेज के जमाने की एक फोटो मिलती है। पूजा को पता चलता है कि अभिनव उसका कॉलेज फैलो है। कॉलेज में शर्मीला अभिनव आज हंसमुख किस्म का इंसान है। इसके बाद दोनों कॉलेज की बातों में लगे रहते हैं। थोड़ी देर बाद ट्रेन के आने के एनाउंसमेंट के साथ ही दोनों प्लेटफॉर्म की ओर चल देते हैं।

कहींह्यूमर, थोड़े इमोशंस

नाटकमें मुख्य किरदारों के संवादों ने बीच-बीच में कुछ ह्यूमर क्रिएट किया। साथ ही कहीं-कहीं इमोशन भी दिखे। नाटक में प्रॉपर्टी के तौर पर स्टेशन के सीन के लिए बैंच का उपयोग किया गया। साथ ही रिकॉर्डेड म्यूजिक में गाने के साथ स्टेशन अनाउंसमेंट का भी उपयोग किया गया। लाइट नाटक के अनुरूप ठीक रही।

मंच पर: पूजाकपूर: सरोज वर्मा, अभिनव: राजीव श्रीवास्तव, राहुल: स्कंद मिश्रा अन्य कलाकार: अवधेश खरे, सलमान, रेनु वर्मा, कृष्णा कौरव, शिखा कौरव, केशव आदि।

मंचसे परे: स्कंदमिश्रा, सचिव भावसार, मनोहर राव, दिनेश नायर, अनूप जोशी आदि।

भारत भवन के अंतरंग सभागार में गुरुवार को प्रस्तुत नाटक के एक दृश्य में प्ले के किरदार। फोटो:एचसी वर्मा

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