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नवरात्रि में व्रत के साथ संयम भी रखें

7 वर्ष पहले
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नवरात्रि के लिए हबीबगंज में तैयार हो रहीं माता की प्रतिमाएं

भेल भास्कर .भोपाल

विश्वविख्यात महर्षि महेश योगी द्वारा विशुद्ध ज्ञान प्राप्त पंडित विनोद तिवारी के अनुसार नवरात्रि में व्रत रखना आम बात है। इस दौरान अधिकांश लोग संयमित भोजन करते हैं तो कुछ लोग बिल्कुल निराहार रहते हैं, लेकिन व्रत का अर्थ सिर्फ भोजन करना ही नहीं है सकारात्मक या सद् विचारों का विकास करना भी है। इच्छाओं पर काबू पाना भी है। इच्छाएं कई प्रकार की हो सकती हैं।

नवरात्रि के प्रथम तीन दिनों में हमें अवगुणों को कम करना चाहिए। शारीरिक शुद्धि के साथ-साथ मानसिक शुद्धि भी जरूरी है। साथ ही आंतरिक प्रसन्नता के मार्ग की पांचों बाधाओं से खुद को दूर रखने की कोशिश करता है। इस दौरान ध्यान देने वाली बात है कि नकारात्मक विचारों को भीतर दबाया नहीं जाना चाहिए। नहीं तो भविष्य में इससे आंतरिक रोग पैदा होने का डर रहता है। पहले तीन दिन विकारों को कम करने के बाद व्रत के अगले तीन दिनों का उपयोग मस्तिष्क को सकारात्मक रूप से तैयार करने के लिए किया जाता है। अच्छी-अच्छी बातें सोचना चाहिए। व्रत के अंतिम तीन दिनों का समय धर्म ग्रंथों को पढ़ने और ध्यान करने उन्हें समझने का होता है। क्योंकि अब हम ज्ञान प्राप्त कर सकने की स्थिति में होते हैं।