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हस्तांतरित कॉलोनियां ही बदहाल

7 वर्ष पहले
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नगरनिगम सीमा बढ़ने के साथ ही चुनावी समीकरण भी बदल गए हैं। जनप्रतिनिधियों का ध्यान नगर निगम में हस्तांतरित कॉलोनियों की बजाए अब उन कॉलोनियों में ज्यादा है जो अहस्तांतरित हैं। इसका असर यह है कि हस्तांतरित कॉलोनियां बदहाल होती जा रही हैं। ज्ञात हो कि भेल क्षेत्र में दो तरह की कॉलोनियां हैं, जिसमें से एक वर्ष 1998 से पहले की और दूसरी इसके बाद की। जानकारों का मानना है िक रिहायशी इलाके बढ़ने से समस्याएं भी तेजी से बढ़ेंगी। अगर अभी से ध्यान नहीं दिया गया तो कुछ ही सालों में पूरा सिस्टम फेल हो जाएगा। करीब 350 से 400 कॉलोनियां आज भी नगर निगम को हस्तांतरित नहीं हैं, जहां नगर निगम सुविधाएं नहीं देता।

रहवासियों के अनुसार नगर निगम चुनाव आने के कारण निगम का पूरा अमला अहस्तांतरित कॉलोनियों में सक्रिय है, जबकि हस्तांतरित कॉलोनियों में सफाई भी नहीं हो रही है। निगम चुनाव के मद्देनजर आजकल अहस्तांतरित कॉलोनियों में विकास कार्यों को लेकर कई जनप्रतिनिधि सक्रिय भी दिखाई दे रहे हैं। इन्हीं कॉलोनियों में कई जगह रेत गिट्टी, सीमेंट और डामर भी पहुंच गया है, लेकिन हस्तांतरित कॉलोनियों की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा। अमरावद खुर्द, अयोध्या नगर जे सेक्टर सहित कई कॉलोनियों में सड़कों की स्थिति इतनी खराब है कि लोग पैदल भी नहीं चल पा रहे हैं। अधिकतर वैध कॉलोनियों में सड़कों के बुरे हाल हैं।

राजीव नगर सेक्टर की सड़क, जिस पर बरसात में निकलना आसान नहीं

इसके लिए नगर निगम अधिकारी, महापौर और वे पार्षद भी जिम्मेदार हैं, जो कॉलोनी हस्तांतरित हो जाने के बाद भी विकास कार्य नहीं करवा पा रहे हैं। कॉलोनी नगर निगम में हस्तांतरित की जाती है, तब नगर निगम के अधिकारी कॉलोनी का निरीक्षण कर मूलभूत सुविधाओं का जायजा लेते हैं कि कॉलोनी का विकास कितना बाकी है। उस आधार पर विकास शुल्क लिया जाता है। नगर निगम में हस्तांतरित हो जाने के बाद कॉलोनियों के विकास की पूर्ण जिम्मेदारी निगम की होती है।

जिम्मेदार कौन

कई कॉलोनियोमें पैदल चलना भी आसान नहीं

हस्तांतरित कॉलोनियोंकी अच्छी खासी सड़कों को भी खोद कर सुधारा नहीं गया

ठेकेदार नेकाम तो ले लिया, लेकिन अधूरा छोड़ दिया

मूलभूत सुविधाएंभी नहीं मिल पा रही हैं हस्तांतरित कॉलोनियों में

गड्ढे, उखड़ीसड़क और अधूरे निर्माण कार्य से परेशान हो गए लोग

वार्ड बढ़नेसे परेशानी भी बढ़ेग