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दुकानों की नए सिरे से नीलामी का व्यापारी कर रहे विरोध
बैरसिया रोड स्थित पं. लक्ष्मीनारायण शर्मा कृषि उपज मंडी समिति के व्यापारियों ने चार साल पहले आवंटित दुकानों को नए सिरे से नीलामी की तैयारी शुरु होने का विरोध करना शुरू कर दिया है। इससे यहां के करीब दो हजार व्यापारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया हे। मंडी के व्यापारी मनोहर मेहरा ने बताया कि वर्ष 2010 में 2025 व्यापारियों ने नई कृषि मंडी करोंद में दुकानें नीलामी में खरीदी थीं। इसमें एक माह के अंदर 259 व्यापारियों ने पूरी राशि जमा की थी और 369 व्यापारियों ने 70 से 80 फीसदी राशि जमा की थी। शेष बचे 1407 व्यापारियों से 10 फीसदी से अधिक राशि जमा कराई थी। इनकी राशि जमा करने के लिए समिति प्रबंधन ने एक माह का समय दिया था। इस अवधि में 259 व्यापारियों ने पूर्ण राशि जमा कर अपनी-अपनी रजिस्ट्रियां करा ली थी, लेकिन जो बच गए थे उन्हें समिति प्रबंधन ने समय तो दिया लेकिन जब पूर्ण राशि जमा करने गए तो यह कर राशि जमा नहीं की कि इन दुकानों के आवंटन का मामला विचाराधीन है। इस मौखिक आदेश के चलते 1407 व्यापारी सिर्फ 10 फीसदी राशि ही जमा कर पाए। शेष राशि जमा करने भटकते रहे। लेकिन हाल ही में इन्हीं दुकानों की पुन: नीलामी की निविदा जारी कर दी गई, जब सभी व्यापारी इकट्ठा होकर मंडी समिति के सचिव से मिले और अपनी बात उनके सामने रखी तो उन्होंने दो टूक शब्दों में कह दिया कि यह दुकानें अब आपको पुन: नीलामी में ही मिलेंगी और शेष जमा दस फीसदी राशि राजसात कर ली गई है। इसके बाद वह व्यापारी भी सकते में गए जिन्होंने 70 से 80 फीसदी राशि जमा की थी।
व्यापारी विष्णु राजपूत का कहना था कि मंडी प्रबंधन ने बस स्टैंड स्थित नवबहार सब्जी मंडी से करोंद विस्थापित कर यह आवंटन प्रक्रिया पूरी की थी, लेकिन व्यापारियों को पूर्ण राशि जमा करने की समय अवधि गुजर जाने के बाद भी ठीक जानकारी नहीं दी। इन दुकानों की पुन: नीलामी की प्रक्रिया शुरु कर दी।
कर चुके हैं शिकायत
व्यापारी मदन माली और कमल शेजवार ने बताया कि इस मामले की शिकायत मंडी बोर्ड के डायरेक्टर, कलेक्टर, क्षेत्रीय विधायक सहित कई अफसरों की जा चुकी है लेकिन इन दो हजार व्यापारियों की रोजी रोटी के संकट पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि इस मामले की जल्द सुनवाई नहीं की गई और व्यापारियों को जल्द न्याय नहीं मिला तो वह उग्र आंदोल