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निजी हाथों में जाएंगे रोजगार दफ्तर, ट्रेंड भी करेंगे, नौकरी भी दिलाएंगे
प्राइवेटसेक्टर की बड़ी कंपनियों में मप्र के युवाओं को ज्यादा से ज्यादा रोजगार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार जिला रोजगार कार्यालयों को पीपीपी मोड में विकसित करने जा रही है। निजी हाथों में सौंपकर रोजगार दफ्तरों को ‘मैच मेकिंग प्लेटफॉर्म’ बनाया जाएगा, ताकि कंपनियों की जरूरत के हिसाब से युवाओं को केवल ट्रेनिंग मिले, बल्कि नौकरी की भी गारंटी हो जाए। उद्योग विभाग ने इस मॉडल की डीपीआर रिपोर्ट बनाने का जिम्मा मुंबई की दारशा कंपनी को सौंपा है, जो दिसंबर में शासन को रिपोर्ट देगी।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व में घोषणा की थी कि रोजगार दफ्तरों को मानव संसाधन विकास केंद्रों के रूप में विकसित किया जाए। इसी के मद्देनजर यह कवायद शुरू हुई है। इस समय प्रदेश में 48 रोजगार दफ्तर हैं, जिनमें से 20 किराए के भवनों में चल रहे हैं। सालाना इनमें 3 से 4 लाख बेरोजगारों के पंजीयन हो रहे हैं। पीपीपी मोड में जाने के बाद निजी क्षेत्र की प्लेसमेंट एजेंसी इन रोजगार दफ्तरों को चलाएगी। जहां रोजगार कार्यालयों के सरकारी भवन हैं, वहां प्लेसमेंट एजेंसी को भी जगह दी जाएगी। जहां भवन नहीं हैं, वहां प्लेसमेंट एजेंसी किराए के भवनों में संचालित होगी।
^पीपीपी मोड में जाने के बाद कांट्रेक्ट लेने वाली प्लेसमेंट एजेंसी मप्र की इंडस्ट्री के साथ-साथ बाहर भी नौकरी की संभावनाएं तलाशेगी। इसका सीधा लाभ मप्र के युवाओं को मिलेगा। वीएलकांताराव, कमिश्नर,उद्योग विभाग
्रदेश में उन्हीं प्लेसमेंट एजेंसी को मैरिट पर मौका दिया जाएगा, जो वायबिलिटी गेप फंडिंग (वीजीएफ) स्कीम में सरकार से कम से कम मदद लें। उन्हें यह छूट रहेगी कि वे युवाओं से ट्रेनिंग का कम से कम शुल्क लें। जिस कंपनी को मैनपॉवर सप्लाई करें, उनसे प्रति व्यक्ति के हिसाब से राशि लें। इस मॉडल पर निजी प्लेसमेंट एजेंसी संचालित होगी। वह चाहे तो कॉल सेंटर खोल सकती है।
निवेशकों के लिए मैनपॉवर भी तैयार करने में जुटा मप्र