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परंपरा, संस्कृति और कला को शब्दों में पिरोया

7 वर्ष पहले
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स्वराजभवन में सोमवार को कवि-कथाकार और आलोचक संतोष चौबे की दो किताब ‘कला की संगत’ और ‘अपने समय में’ का लोकार्पण किया गया। लेखक ने इन किताबों में परंपरा, संस्कृति और कला को शब्दों के जरिए पेश किया है। किताब ‘अपने समय में’ परंपराओं और आधुनिकताओं दिखाया गया है। वहीं, ‘कला की संगत’ में नए रचनाकारों के बारे में बताया गया है। इस मौके पर संतोष चौबे ने कहा, ‘पुराने रचनाकारों के बारे में सब चर्चा करते हैं, लेकिन मैंने किताब में नए साहित्यकारों के लेखन शैली और रचनात्मक प्रकिया के बारे में चर्चा की है।’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित साहित्य के जानकार डॉ. धनंजय वर्मा, कवि राजेश जोशी, आलोचक पंकज चतुर्वेदी के साथ बड़ी संख्या में शहर के वरिष्ठ लेखक, कलाकार और संस्कृतिकर्मी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालक कला समीक्षक विनय उपाध्याय ने किया।

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