सिटी के रंगकर्मी बना रहे स्क्रिप्ट बैंक
डायरेक्टर नहीं लेते कोई रिस्क
यंगस्क्रिप्ट राइटर रफी शब्बीर ने बताया कि वे अब तक 20 स्क्रिप्ट लिख चुके हैं। उनकी लिखी 10 से ज्यादा स्क्रिप्ट पर नाटक मंचित हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि डायरेक्टर्स नई स्क्रिप्ट पर काम नहीं करना चाहते। वे सिर्फ पुराने और प्रसिद्ध नाटकों पर काम करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी में भी अच्छा काम हो सकता है, बशर्ते डायरेक्टर्स पहले नाटकों की स्क्रिप्ट्स पर काम करें।
1974 में खरीदी थी पहली स्क्रिप्ट
रंग निर्देशक अशोक बुलानी ने बताया कि उनके पास 18 स्क्रिप्ट हैं। उन्हें स्क्रिप्ट खरीदने का बहुत शौक है। उन्होंने सबसे पहले 1974 में 20 रुपए में एक स्क्रिप्ट खरीदी थी। वहीं, निर्देशक केजी त्रिवेदी ने बताया कि शहर के रंगप्रेमी भी चाहते हैं कि वे नई कहानी को मंचित होता देखें। उन्होंने बताया कि हर कलाकार का स्वयं का स्क्रिप्ट बैंक होता है। हर साल वे 20 से 25 स्क्रिप्ट्स खरीदते हैं। केजी त्रिवेदी के पास 200 स्क्रिप्ट्स का बैंक है।
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स्क्रिप्ट बैंक के संबंध में चर्चा करते शहर के थिएटर आर्टिस्ट्स।
रिफ्रेंस के लिए कर सकते हैं इस्तेमाल
भारत भवन की चीफ लाइब्रेरियन अरुणा श्रीवास्तव का कहना है कि भारत भवन के पास लगभग 5 हजार नाटकों की स्क्रिप्ट उपलब्ध हैं। ये नाटक लगभग सभी भारतीय भाषाओं के साथ अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन जैसी फॉरेन लैंग्वेज में भी हैं। उन्होंने बताया कि भारत भवन हर साल नाटकों की स्क्रिप्ट को एकत्र करता है। इसके जरिए युवा कलाकार रिफ्रेंस के तौर पर स्क्रिप्ट्स का उपयोग कर सकते हैं। सिटी के वरिष्ठ निर्देशक सतीश मेहता ने बताया कि उनके पास हिंदी और अंग्रेजी की 500 से ज्यादा नाटकों की किताबें और स्क्रिप्ट्स हैं। उन्होंने बताया कि हिंदी में नाटकों की अच्छी स्क्रिप्ट्स नहीं लिखी जा रही है। इसलिए दर्शकों को पुराने नाटक देखने पड़ते हैं। सिटी में भी रंग निर्देशकों को स्क्रिप्ट बैंक बनाना चाहिए ताकि वे स्वस्थ्य और ताजा मनोरंजन परोस सकें।