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बड़े तालाब के मास्टर प्लान के लिए वक्त नहीं, पर विवादित प्रोजेक्ट शुरू

7 वर्ष पहले
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बड़ेतालाब के संरक्षण के लिए जरूरी मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को मंजूर करने का अफसरों के पास वक्त नहीं है, लेकिन तालाब के आसपास निर्माण कार्य के लिए हड़बड़ी की जा रही है। नगर निगम ने 13.13 करोड़ रुपए के विवादित लेक डेवलपमेंट फ्रंट का काम शुरू करने की तैयारी कर ली है। निगम यहां वीआईपी रोड स्थित व्यू पाइंट से खानूगांव तक बड़े तालाब के किनारे पेड़ों को काटकर पाथवे, पार्किंग और फूड जोन बनाने का काम करेगा। निगम की इस मामले में जल्दबाजी इतनी है कि साधिकार समिति के निर्देश के तहत मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार करने वाली सेप्ट यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट का भी इंतजार नहीं किया गया है। निगम की इस मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि चूंकि अफसरों को प्लानिंग में कमीशन नहीं मिलता है, इसलिए मास्टर प्लान को ठंडे बस्ते में डाल रखा है, जबकि निर्माण कार्यों में अफसर मोटे कमीशन के चक्कर में विवादित प्रोजेक्ट पर भी काम शुरू करना चाहते हैं।

राज्य शासन द्वारा बड़े तालाब के संरक्षण के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने 27 अगस्त को मास्टर प्लान को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी। तभी इस पर 15 दिन के भीतर दूसरे विभागों से राय लेकर इसे प्रकाशित करने का फैसला लिया था। निगम को भी प्लान आने से पहले लेक डेवलपमेंट फ्रंट प्रोजेक्ट पर सेप्ट से रिपोर्ट लेकर ही काम शुरू करने के लिए कहा था, लेकिन इसके बाद तो साधिकार समिति ने मास्टर प्लान प्रकाशित किया और ही निगम ने सेप्ट से कोई रिपोर्ट ली। बल्कि, इस हफ्ते निगम ने टेंडर ठेकेदार केएन नारंग को देकर वर्कआर्डर जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। संभवत: इसी हफ्ते वर्कआर्डर देकर काम शुरू कर दिया जाएगा।

महापौर कृष्णा गौर की अध्यक्षता में बनी साधिकार समिति ने बैठक में इस पर आपत्ति उठाई थी। इसमें यह तय हुआ था कि सेप्ट, इस पूरे प्रोजेक्ट का विस्तृत पर्यावरणीय अध्ययन करेगी और फिर तालाब को यदि इस प्रोजेक्ट से नुकसान पहुंचता है तो इसे रद्द करने की सिफारिश करेगी। साथ ही खानूगांव में प्रस्तावित बोट क्लब का विकल्प भी सेप्ट की टीम बताएगी।

वर्तमान में प्रोजेक्ट वाले स्थान पर घना जंगल है। इसे राजधानी परियोजना प्रशासन (सीपीए) ने भोज वेटलैंड परियोजना के तहत 15 साल पहले विकसित किया था। यहां काफी पेड़-पौधे लगे हैं और विदेशी पक्षी भी आते हैं। यानी कि यह स्थान इको सें