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कलियासोत नदी के विकास के लिए अब बढ़े कदम

7 वर्ष पहले
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कोलार से होकर गुजरी कलियासोत नदी के संरक्षण और विकास को लेकर जागरूक नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के बाद अब राज्य सरकार ने भी सोचना शुरू कर दिया है। सरकार नदी को संरक्षित कर उसे पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयास करेगी। इसके लिए डीपीआर बनेगी। हाल ही में विधान सभा के शीत कालीन सत्र में प्रश्नकाल के दौरान नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसकी जानकारी दी है। हालांकि रिपोर्ट कब तक तैयार होगी और उस पर कितना खर्च होगा इसके बारे में नहीं बताया गया है। हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा ने नदी के संरक्षण विकास को लेकर प्रश्न किया था। उन्होंने नदी के विकास के लिए विभाग की योजना के बारे में पूछा था।

विधायक का कहना है कि कलियासोत नदी का अस्तित्व बनाए रखना कोलार के साथ ही शहर के भी हित में है। इसलिए उसे प्रदूषण, अतिक्रमण, अवैध निर्माण से बचाना है और पर्यावरण पर्यटन का केंद्र बनाना है। गौरतलब है कि विधायक रामेश्वर शर्मा पूर्व से ही कलियासोत नदी के संरक्षण विकास के लिए प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने पिछले साल नदी बचाने के लिए उसमें पद यात्रा निकाली थी। झील महोत्सव की तर्ज पर कलियासोत महोत्सव मनाने पर्यटन विकास निगम को पत्र लिखा था।

जिम्मेदार एजेंसियों के अफसर कर रहे खानापूर्ति

कलियासोत नदी के संरक्षण विकास के लिए भले ही जागरूक नागरिक, पर्यावरण विद्, विधायक, राज्य सरकार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जिन सरकारी एजेंसियों के अधिकारी कर्मचारियों को इन प्रयासों को अंजाम तक पहुंचाना है वो खानापूर्ति में जुटे नजर आते हैं। रोक के बाद भी नदी के आसपास निर्माण जारी होने के मामले सामने चुके हैं। 20 से ज्यादा कॉलोनियों का सीवेज का पानी नदी में मिल रहा है।

एनजीटी द्वारा कलियासोत नदी के 33 मीटर के दायरे में निर्माण पर रोक लगाने के बाद अब नगरीय प्रशासन एवं पर्यावरण विभाग उसके विकास करने के बनाएगा डीपीआर