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ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने एजेंसियों में तालमेल जरूरी
ट्रैफिकव्यवस्था सुधारने के प्रयास तो हो रहे हैं, लेकिन इसका असर देखने को नहीं मिल रहा है। इसके लिए जरूरी है कि लोक निर्माण विभाग, राजधानी परियोजना प्रशासन, नगर निगम और बिजली कंपनी के बीच तालमेल हो। सड़क निर्माण के समय ही फुटपाथ निर्माण, ड्रेनेज सिस्टम, यातायात में बाधक बिजली के खंभे हटाने की जिम्मेदारी तय होना चाहिए। कई जगह टेलीकाॅम कंपनियों के बॉक्स और बीच सड़क पर चैंबर भी खतरनाक हैं। इसी तरह स्पीड ब्रेकर निर्माण के दौरान उसके मापदंडों का ध्यान रखा जाए तभी यातायात व्यवस्था में सुधार सकेगा।
बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या को देखते हुए बड़े स्तर पर बुनियादी सुधार होने चाहिए। जिस तरह से महानगरों में संकरी गलियों तक में ट्रैफिक सुचारु चलता है वैसे ही यहां भी व्यवस्था होना चाहिए। पुराने शहर में भी चौराहे और तिराहे काफी चौड़े हैं, लेकिन यह अतिक्रमण से घिरे हैं। बस स्टॉप नहीं हैं। अव्यवस्थाओं के बीच यात्री बसों का इंतजार करते हैं। ऐसे में यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है।
फुटपाथोंकी सुधरे हालत
सेंट्रललाइब्रेरी चौराहा, अल्पना तिराहा, हमीदिया रोड, भोपाल टॉकीज चौराहा, शाहजहांनाबाद, काजी कैंप, करोंद जैसे व्यस्ततम मार्गों पर दिन भर जाम जैसे हालात रहते हैं। जगह-जगह अतिक्रमण है। फुटपाथ बने हैं, लेकिन जगह-जगह गड्ढे हैं। ऐसे हालात में लोग सड़क किनारे ही चलने को मजबूर हैं। सबसे अधिक परेशानी रेलवे स्टेशन से बाहर निकलकर बस स्टॉप तक पहुंचने में होती है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए शहर की यातायात व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए। इसके लिए विभिन्न स्थानों पर फुटओवर ब्रिज बनना चाहिए।
पुराने शहर में सड़क बन गईं तो बिजली के खंभे और पाइप लाइनें बाधक बन रही हैं। तालमेल और जिम्मेदारी तय नहीं होने के कारण हालात में सुधार नहीं हो रहा है। ये कहना है समाजसेवी जावेद अख्तर का...
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