संतनगरवासी होना है मेरी खुशनसीबी
संतनगरको सिंधी विस्थापितों ने अपनी मेहनत से आर्थिक रूप से समृद्ध बनाया है, वहीं सामाजिक सरोकार से जुड़ी संस्थाओं ने इसे समाजसेवी क्षेत्र की पहचान भी दी है। सरकारी स्तर पर सुविधाओं में इजाफा हुआ है।
मेरे शहर को क्या मिलेगा इसकी बात मैं इससे पहले करूंगा, क्या नहीं मिलेगा की बात करने से पहले। स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हुआ, जिस भव्य सिविल अस्पताल की इमारत में शासकीय स्वास्थ्य सेवा मिल रही हैं, उसकी कल्पना भी इसके निर्माण से पहले नहीं थी। यह जरूर है, इलाज के स्तर पर अभी कमी है। हाई स्कूल और हायर सेकंडरी स्तर पर तीन शासकीय स्कूल उपनगर में हैं। निजी स्तर पर संचालित शिक्षा संस्थान तो राजधानी के सीबीएसई स्कूलों को मात दे रहे हैं।
लोकूमल आसवानी समाज सेवी
सामाजसेवी हैं लोग
यहसंतनगरवासियों के लिए गर्व करने वाली बात है कि यहां समाज के प्रति अपने दायित्व का निर्वाहन करने वालों की कमी नहीं है। संत हिरदारामजी ने जो समाजसेवा का पाठ लोगों को पढ़ाया है, उस पर वह आज तक चल रहे हैं। निर्धनों की हर जरूरत को पूरा करने वाली सामाजिक संस्थाएं हैं। यहां तक कि जब शासकीय स्तर पर जलसंकट का समाधान नहीं हो पा रहा था उस दौर में भी उपनगर में लोगों को नि:शुल्क पानी संतजी की जल सेवा से मिला है। पानी सप्लाई के लिए होने वाला बिजली का खर्च भी नवयुवक परिषद ने उठाया है।
मौसममें हिफाजत
हरमौसम की मार गरीबों को परेशान करती है, उपनगर में दर्जनों संस्थाएं ऐसी हैं, जो सर्दियों में कंबल का वितरण करती हैं। जब गर्मी सताती है तो राहगीरों की प्यास बुझाने मुख्य मार्ग पर आधा दर्जन से अधिक प्याऊ ठंडा पानी पिलाते हैं। स्टेशन पर जाकर भी यात्रियों को समाजसेवी संस्थाएं पानी पिलाने की व्यवस्था करते हैं।