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धािर्मक आयोजनों के साथ सेवा के रास्ते पर हरचूराम धाम
छठवेंदशक में धार्मिक आयोजनों के लिए हरचूराम धाम की स्थापना हुई, तब से आज तक सत्संग, भजन, प्रभु भक्ति का अनवरत सिलसिला बना हुआ है। सुबह-शाम प्रभु भक्ति होती है। यहां आस्था की मिसाल एक अखंड ज्योति सन् 1956 से प्रज्ज्वलित होकर प्रभु में मन लगाने की सीख दे रही है। सतनाम सांई कमी काई, हरचूराम धाम में आस्था भक्ति ही नहीं, बल्कि सेवा का संगम भी देखने को मिलता है। धाम के सेवाधारी, प्रभु भक्ति के साथ मानव सेवा का मौका कभी हाथ से नहीं जाने देते। पीड़ितों की सेवा को भी इन्होंने अपना धर्म और प्रभु की भक्ति मान लिया है। फागुन माह में द्वादशी के दिन धाम में सांई सेऊराम जी का बरसी महोत्सव आयोजित होता है, जिसमें भजन-कीर्तन रामधुनी एवं भंडारे का आयोजन होता है। प्रतिमाह गरीब महिलाओं को अनाज दिया जाता है।
वर्षभरहोते हैं धार्मिक कार्यक्रम
धाममें पूरे साल सिंधी समाज के सभी त्यौहारों सहित कई तरह के आयोजन होते हैं, जिसमें सिंधियत का पुराना रंग नजर आता है। चैतीचांद, जन्माष्टमी के मौके पर यहां भव्य कार्यक्रम होता है, जिसमें भगवान झूलेलाल सहित संत-महात्माओं को याद किया जाता है। शहर की खुशहाली के लिए पल्लव हर मौके पर होता है। लोग भगवान झूलेलाल से संत हिरदाराम नगर और मानव कल्याण की कामना करते हैं।
सुबह-शामहोता है भजन-कीर्तन
हरचूरामधाम संतनगर के ओल्ड डेयरी फार्म रोड इलाके में स्थिति है, जहां सुबह-शाम सत्संग भजन-कीर्तन होता है। यह धाम संत सेऊराम जी से जुड़े सैकड़ों साधकों के लिए किसी तीर्थ से कम नहीं है। बड़ी संख्या में लोग अपने दिन की शुरुआत धाम में माथा टेककर करते हैं। जरूरतमंदों की सेवा धाम से की जाती है।
जलेके लिए औषधीय मल्हम
गर्मपानी ये अन्य कारणों से जल जाने वालों के लिए धाम में औषधीय मल्हम प्रभु की एक ऐसी औषधि है। धाम के सेवाधारियों ने बताया कि लेकर संत हिरदाराम नगर के अलावा दूर-दूर से लोग आते हैं। उनकी मानें तो मल्हम से जलने का जख्म सूख जाता है, यहां तक कि निशान भी दिखाई नहीं देता। धाम से यह मल्हम लोगों को नि:शुल्क दिया जाता है।
इसी तरह के और भी कई सेवा कार्य हरचूराम धाम के सेवाधारी समय-समय पर करते हैं। लोगों में ईश्वर के प्रति आस्था बनी रहे, सभी सद् मार्ग पर चलें बस इसी को ध्येय बनाकर धाम के पदाधिकारी लगातार सेवा कार्यों से जुड़े रहते हैं और अन्य लोगों को जोड़ रहे हैं।
हरचूराम धाम|स्थापना - 1962|प्रमुख - तेजू शेवारामानी
ओल्ड डेरी फाॅर्म स्थित हरचूराम धाम, जहां जले का मल्हम भी मिलता है।