चकरी नहीं अब रहट बाकी है
मछलीघर रोड पर बनी एतिहासक रहट आज भी बरकरार है। ये रहट पानी खींचने के लिए प्राचीन तकनीक का सुंदर उदाहरण है। क्रत्रिम जलमार्ग का निर्माण छोटे तालाब से नूरबाग तक पानी ले जाने के लिए किया गया था, जो नवाब जहांगीर मो खान के बगीचे तक जाती थी। तालाब के किनारे पर 20 मीटर ऊंची दीवार में खुली नाली ऊपरी भाग में थी। जाे ढालदार होती हुई नूरबाग तक जाती थी। गुरुत्वाकर्षण से पानी खींचकर ढाई किमी तक पहुंचाया जाता था। पार्यर्सन चकरी द्वारा पानी खींचा जाता था। अब ये चकरी तो नहीं पर रहट बाकी है।
धीमा चल रहा संरक्षण और संवर्धन का काम
पुराने शहर में ऐसी कई ऐतिहासिक धरोहरें हैं जिन्हें सहेजने की जरूरत है। अभी तक इस दिशा में जो भी काम हुए हैं वे संरक्षण और संवर्धन के लिए काफी नहीं हैं। ताजमहल के रिनोवेशन का काम भी धीमी गति से चल रहा है। अिधकांश एतिहासिक दरवाजे अतिक्रमण की चपेट में हैं। कई दरवाजों का मेंटेनेंस किया गया, लेकिन दोबारा इनके मेंटेनेंस की जरूरत नहीं समझी। निशात अफजा, नवीन नगर, बाग उमराव दूल्हा जैसे इलाकों में एतिहासिक धरोहर का अस्तित्व ही खत्म हो रहा है। कई बावड़ियां अपना वजूद खो चुकी हैं तो कई खोने की कगार पर हैं। लिहाजा इनके संरक्षण और संवर्धन की ओर कारगर कदम उठाने की जरूरत है। पिछले दिनों जहां संभागायुक्त एसबी सिंह ने भी ताजमहल के भ्रमण के दौरान रिनोवेशन के काम की धीमी गति देखकर नाराजगी जाहिर की थी वहीं अब निगम प्रशासन, पर्यटन विकास निगम, पुरातत्व विभाग में अपने काम में तेजी लाने की तैयारी कर रहा है। पुराने शहर की समाजसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि ये धरोहरें भोपाल की पहचान हैं। इनके संरक्षण के लिए कारगर कदम उठाए जाएं।
हो रहा है रिनोवेशन
निगम आयुक्त तेजस्वी एस नायक का कहना है कि उक्त स्थल को संवारा जा रहा है। आसपास सुंदर पार्क विकसित है। विसर्जन घाट का निर्माण भी किया जा रहा है। रहट को आकर्षक लुक देने के लिए लाइटिंग की गई है। यहां बने फुटपाथ को दुरुस्त किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि एतिहासिक धरोहरों को गंभीरता से साथ संवारा जाए।
मछलीघर रोड पर बनी एेतिहासिक रहट।