लिंकरोड नंबर एक पर
वन नर्सरी में एक ग्रीन हाउस और हाईटेक मिस्ट हाउस भी बनाया गया है, जहां हाई ब्रीड पौधे तैयार होंगे। इसकी खासियत यह है की यह टेंपरेचर कंट्रोल करता है और यूज के अनुसार पानी डिस्पेंस करता है। क्रॉप की अच्छी ब्रीड तैयार हो इसलिए उनका सीडलिंग काफी प्रिकॉशन से तैयार किया जाता है। यहां पर तैयार सारे पौधे एक समान ग्रोथ करते हैं क्योंकि इनको सारे जरूरी न्यूट्रिएंट्स एक ही क्वांटिटी में दिए जाते हैं। इनके जींस एक से होंगे और पौधों की क्वालिटी भी प्राकृतिक वातावरण में तैयार होने वाले पौधों से अधिक होगी। यान
लिंकरोड नंबर एक पर बने वन विकास निगम के 17 एकड़ एरिया में वन नर्सरी बनी हुई हैं। यहां जल्द ही भोपालाइट्स को बॉटनिकल गार्डन की सौगात मिलने वाली है। इस रिजर्व फॉरेस्ट एरिया में यह गार्डन 07 एकड़ एरिया पर तैयार किया जाएगा। यह रिजर्व फॉरेस्ट एरिया इंडियन फॉरेस्ट एक्ट 1927 में इंडियन गैजेट में शामिल और मार्क किया गया था। शहर के बीचों बीच रिजर्व फॉरेस्ट होना अपने आप में ही एक अनोखी बात है।
एक्ज़ॉटिकप्लांट्स होंगे अट्रैक्शन
इसबॉटनिकल गार्डन में ऐसे पौधे लगाए जाएंगे जो इंडिया के लिए तो इंडीजिनीयस हैं, लेकिन एमपी के लिए एक्ज़ॉटिक हैं। साइकस, जामिया, ओरिका पॉम (इंडीजिनीयस टू इंडिया), साइकस रामी, यलो बैंबू, ब्लू लिली और वॉटर लिली जैसे प्लांट्स इस गार्डन में देखने को मिलेंगे। यह पौधे आमतौर पर एक जगह पर मिलना मुश्किल है, लेकिन यहां पर इन्हें एक खास टेक्नीक से तैयार किया जा रहा है। बैंबू की पूरे इंडिया में कुल 28 वैराइटीज़ मौजूद हैं, जिनमें से मध्यप्रदेश में बैंबू की केवल दो ही वैराइटीज़ देखने को मिलती हैं। बॉटनिकल गार्डन बन जाने के बाद यहां बैंबू की सात वैराइटीज देखने को मिलेंगी। जानकारी के मुताबिक, इस गार्डन के जून, 2015 तक तैयार हो जाने की उम्मीद है।
भोपाल में बनने वाला यह बॉटनिकल गार्डन, शहर को ग्रीन डेस्टिनेशन बनाने में मदद करेगा। इसके जरिए लोगों को पेड़ पौधों के बारे में जानने का मौका मिलेगा।
रवींद्रनाथ सक्सेना, प्रिंसिपलचीफ कंजर्वेटर आॅफ फाॅरेस्ट (आईएफएस)
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