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समय पर समझाइश से रुक सकती है खुदकुशी

6 वर्ष पहले
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इन दिनों युवाओं के आत्मविश्वास में कमी रही है। पढ़ाई या बीमारी का तनाव हो या फिर पारिवारिक समस्या, वे इनसे निपटने के बजाय आत्महत्या का रास्ता चुन रहे हैं। इस तरह के कदम उठाने की सबसे बड़ी वजह यह है कि वे अपनी समस्या किसी से साझा नहीं करते। मन ही मन घुटते रहते हैं और अंत में खुदकुशी का रास्ता अपना लेते हैं। वे इस बात को याद नहीं रखते कि उनके इस कदम के बाद उनके परिवार के लोगों को किन हालातों से गुजरना पड़ता है। ऐसे ही कई मामले भोपाल में देखने को मिले, जहां तनाव से छुटकारा पाने के लिए खुदकुशी कर ली। हाल ही में एक बैंककर्मी ने भी काम के तनाव के चलते और एक छात्र ने पढ़ाई के तनाव के चलते आत्महत्या का रास्ता चुना। डीबी स्टार ने विशेषज्ञों से बात कर जाना कि इस तनाव से निपटने के क्या रास्ते हो सकते हैं।

क्याकरें माता-पिता

Áमाता-पिता अपने बच्चों का ध्यान रखें

Á माता पिता दोस्त जैसा व्यवहार रखें

Á अभिभावक अपने बच्चों को समय दें

Á बच्चों को समस्या है तो उसका हल साथ बैठकर निकालें

Á फोन पर ऐसी कोई बात करें, जिससे बच्चा उत्तेजित हो जाए

Á बच्चों द्वारा चलाए जा रहे इंटरनेट अन्य गतिविधियों पर ध्यान रखें

Á बच्चों को उनकी अच्छी-बुरी आदतें विस्तार से बताएं

Á यदि बच्चा होस्टलर है तो महीने में एक-दो बार जाकर उसका हालचाल पूछें

Á बच्चा पढ़ाई में कमजाेर है तो ताना मारें

Á बच्चे की कमजोरी दूर करने की कोशिश करें

Á बच्चों पर अपनी मर्जी थोपें

Á बच्चों को यह अहसास कराएं कि माता-पिता के लिए उनकी बहुत अहमियत है

कईकारण हैं तनाव के

Áबच्चों में सहनशीलता की कमी

Á अपनी बात किसी से नहीं कह पाना

Á अकेले में गुमसुम रहना

Á माता-पिता के पास बच्चों के लिए समय नहीं होना

Á पढ़ाई के लिए घर से दूर रहना

Á किसी घटना से ग्लानी महसूस करना

Á पढ़ाई में कमजोर होना

Á प्रेम प्रसंग में असफल होना

Á मन में असुरक्षा की भावना घर कर जाना

Á नशे की लत पड़ना

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