केस 1.
केस 1.
सारनीसे भोपाल आई एमबीए छात्रा स्वाति (27) पढ़ाई के साथ नौकरी भी करती थी। उसने सुसाइट नोट में लिखा कि मैं जिंदगी से तंग चुकी हूं।
केस2.
दीपककुशवाहा (12) की मम्मी ने उसे किसी बात पर डांट दिया। सहनशक्ति कम हाेने की वजह से उसने इस बात पर आत्महत्या कर ली।
केस3.
अनूपपुरनिवासी जयश्री विश्वकर्मा (19) हाॅस्टल में रहकर डेंटल कॉलेज में पढ़ रही थी। आत्महत्या से पहले उसने पापा से कहा कि उसे अच्छा नहीं लग रहा है।
केस4.
बांगरोदनिवासी पूजा पटेल बीमारी की वजह से तनाव में रहने लगी थी। परिजनों ने कई बार उसकी झाड़-फूंक कराई। अंतत: उसने मौत को ही गले लगा लिया।
केस5.
श्यामनगर निवासी महिमा सारा सिमोन (16) परिवार के सदस्य कहीं गए हुए थे। वह घर पर अकेली थी और उसने आत्महत्या कर ली।
केस6.
समीरकांबले (22) इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ता था, लेकिन वह पढ़ाई में काफी कमजोर था। आत्मविश्वास की कमी के चलते उसने आत्महत्या कर ली।
केस7.
प्रेरणानिंबोरे (15) पढ़ाई में कमजोर थी, इसके बावजूद वह डॉक्टर बनना चाहती थी। वह गुमसुम रहने लगी थी। अंतत: उसने आत्महत्या कर ली।
केस8.
अन्नपूर्णा(22) नौकरी करती थी। किसी ने उसे धोखा दिया। सहनशीलता की कमी के कारण उसने आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया। ऐेसे कई अन्य केसेस भी सामने आए हैं।
^मन भटकजाता है
फिलहालतनाव का जो सबसे बड़ा कारण है, वह मोबाइल फोन और सोशल मीडिया है। कम उम्र के बच्चे इससे जुड़ जाते हैं और उनको यह समझ में नहीं आता कि उनकी दोस्ती किन लोगों से हो रही है। इससे धीरे-धीरे वे तनाव का शिकार हो जाते हैं।
सुषमावाघ, काउंसलर
^बच्चे शेयरकरते हैं
अधिकांशबच्चे माता-पिता से अपनी बात नहीं कह पाते हैं। माता-पिता भी उन्हें पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं। ऐसे में बच्चे तनावग्रस्त हो जाते हैं। हमारे पास जो भी बच्चे काउंसलिंग के लिए आते हैं, उनमें से ज्यादातर इसी तरह की बातें शेयर करते हैं।
डॉ.प्रीति माथुर, मनोविशेषज्ञ
आत्महत्या के कुछ मामले और कारण