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लोन में बदलेगी 2000 करोड़ रुपए की ग्रांट
केंद्रसरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने वर्ष 2008 में प्रदेश को आरएपीडीआरपी (पुनर्गठित त्वरित विद्युत विकास एवं सुधार कार्यक्रम) के तहत 2034.60 करोड़ रुपए का अनुदान प्रदेश सरकार को दिया था। अनुदान देते समय शर्त रखी गई थी कि अगले पांच साल में बिजली कंपनियों को लाइन लॉस 15 प्रतिशत से कम लाना होगा। लेकिन अभी भी लाइन लॉस 30 प्रतिशत से अधिक है। लाइन लाॅस कम नहीं होने के कारण अब 2034.60 करोड़ रुपए की राशि लोन में तब्दील हो जाएगी। यह योजना प्रदेश के 81 टाउन्स (शहरों) में चल रही है। इस योजना का उद्देश्य था कि एटीएंडसी लॉस 15 प्रतिशत पर जाए। इसके क्रियान्वयन के लिए मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को 31 टाउन के लिए 833.39 करोड़, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 26 टाउन के लिए 622.45 करोड़ पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 23 टाउन के लिए 538.76 करोड़ रुपए अनुदान के रूप में दिए गए थे।
इंस्पेक्शनएजेंसीज का धोखा
बिजलीकंपनी में आरएपीडीआरपी के कामों का इंस्पेक्शन करने का सबसे पहले दायित्व व्याएंट्स सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा था, लेकिन यह कंपनी काम छोड़कर चली गई। इसके बाद इंस्पेक्शन का काम फीडबैक को सौंपा गया। फीडबैक ने इसके लिए कंपनी से 14 करोड़ रुपए लिए, लेकिन रिपोर्ट सही नहीं बनाई। लाइन लॉस मतलब यदि 100 यूनिट बिजली की सप्लाई की गई है तो इसमें से 85 यूनिट का पैसा उपभोक्ता से बिजली कंपनी को मिलना चाहिए।
^ लोनमें तब्दील नहीं होगा
आरएपीडीआरपीके तहत जो अनुदान मिला है, उसे लोन में तब्दील नहीं होने देंगे। इसके लिए प्लानिंग चल रही है। हम लाइन लॉस कम कर लेंगे। आप चिंता करें।
विवेकपोरवाल, एमडी,मप्र मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी
^अभी हमारेपास समय है
जिनटाउन्स में यह योजना चल रही है, वहां एटीएंडसी लॉस कम करने का प्रयास किया जा रहा है। पार्ट के तहत जो काम हो रहे हैं उनकी अंतिम तिथि 15 मार्च है और पार्ट बी का काम पूरा होने में अभी समय है।
आईसीपीकेसरी, प्रमुखसचिव, ऊर्जा विभाग मप्र
बर्बादी का आरएपीडीआरपी