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नदियों में रहेगा साल भर पानी!

6 वर्ष पहले
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प्रदेशकी नदियों में कभी भी पानी की कमी हो और उनमें सालभर लबालब पानी रहेे, इसके लिए प्रदेश सरकार उनका संरक्षण करने जा रही है। नदियों के प्राकृतिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित किए जाने की योजना बनाई गई है। प्रोजेक्ट के प्रथम चरण में ग्वालियर की पांच नदियों को संरक्षित किया जाएगा। इनमें मुरार की बेसली, घाटीगांव की महुअर, डबरा की छछूंद तथा भितरवार की नोन नदी शामिल है। इसके अलावा मोहना के प्राकृतिक नाले को भी नदी का दर्जा देकर संरक्षित किया जाएगा।

25किमी एरिया में है बेसली नदी

मुरारकी बेसली नदी का कैचमेंट एरिया करीब 25 किलोमीटर तक फैला हुआ है। इसका उद्गम स्थल इकहरा है और सुपावली नामक स्थान पर जाकर खत्म होती है। इसी तरह घाटीगांव की महुअर नदी का कैचमेंट क्षेत्र 18 किमी का है। यह भंवरपुरा गांव से निकलकर सुल्तानगढ़ के पास पार्वती नदी में मिल जाती है। डबरा की छछूंद नदी का कैचमेंट क्षेत्र 40 किमी है। यह जौरासी से निकलकर सिली सिलेटा गांव के पास सिंध नदी में मिलती है। भितरवार की नोन नदी का कैचमेंट क्षेत्र लगभग 45 किमी है। यह हिम्मतगढ़ तालाब से निकलकर सिंधुपुरा गांव के पास सिंध नदी में मिल जाती है। इसके अलावा मोहना नाले का कैचमेंट क्षेत्र भी आठ से दस किमी तक फैला हुआ है। इसे जन अभियान परिषद की ग्वालियर शाखा ने गोद लिया है और इसका नाम बदलकर मानपुरा नदी कर दिया है।

ऐसेकरेंगे जल संरक्षण

सूखचुकी नदियों और नालों में जल संरक्षण के लिए उनके निकट के प्राकृतिक स्रोतों का भी संरक्षण किया जाएगा। पहाड़ों से रिसने वाले जल स्रोतों के मार्ग पर बोल्डर का इस्तेमाल कर चेक डैम का निर्माण किया जाएगा। इसी प्रकार नदियों के मार्ग में भी जगह-जगह चैक डेम बनाए जाएंगे। जिन स्थानों पर जलभराव वाली जगह उथली हो गई है, वहां पर उनके गहरीकरण का कार्य व्यापक स्तर पर किया जाएगा। इस काम में एनजीओ की मदद लेंगे।