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मिनरल वॉटर की बोतल बार-बार करें उपयोग

7 वर्ष पहले
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मिनरलवॉटर बॉटल में प्लास्टिक की पतली कोटिंग होती है। एक-दो बार इस्तेमाल करने पर यह कोटिंग निकल जाती है और प्लास्टिक में मौजूद तत्व पानी के साथ घुल जाते हैं। इससे कई बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। बाजार में मिलने वाली अन्य प्लास्टिक की बोतलों के साथ यह समस्या नहीं होती। यह जानकारी मुंबई स्थित एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ ऑन्कोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. पूर्विश पारिख ने दी।

वे होटल कोर्टयार्ड बाय मैरियट में कैंसर के निदान पर आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे। डॉ. पारिख ने बताया कि डिब्बाबंद या पैकेज्ड फूड को भी खाने से पहले काफी सावधानी बरतनी चाहिए। अगर पैकिंग काफी पुरानी है, तो इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। तीन दिनी इस कार्यशाला का रविवार को समापन हुआ। आयोजन समिति के सचिव डॉ. टीपी साहू ने बताया कि इस कार्यशाला में कई रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए गए।

कार्यशाला में कैंसर के निदान को लेकर अपने विचार व्यक्त करते विशेषज्ञ।

टाटा मेमोरियल अस्पताल में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और पेट के कैंसर के विशेषज्ञ डॉ. शैलेश वी. श्रीखंडे ने बताया कि भारत में बड़ी आंत के कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। पहले एक लाख की आबादी में सिर्फ 2-3 लोगों को ही यह होता था, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़कर 4-5 हो गई है। उन्होंने बताया कि भारत में गाल ब्लेडर का कैंसर डॉक्टरों के लिए पहेली बना हुआ है। देश के अन्य हिस्सों की बजाय उप्र, बिहार, झारखंड, बंगाल और मप्र में ही इसके मरीज ज्यादा हैं। ऐसा क्यों है, इसकी कोई जानकारी नहीं है।

डॉ. पारिख ने बताया कि सामान्य तौर पर एक-दो घंटे तक मोबाइल फोन पर बात करने पर भी कैंसर या कोई अन्य बीमारी नहीं होती। यह सिर्फ अफवाह है। किसी रिसर्च में भी यह बात अब तक साबित नहीं हुई है। अगर कई सालों तक रोज कई घंटों तक मोबाइल पर बात करे, तो बीमारी की आशंका को नकारा नहीं जा सकता। हमारे देश में कैंसर के तीन प्रमुख कारण हैं, तंबाकू, शराब और मोटापा। अगर इन तीनों पर नियंत्रण रखा जाए, तो कैंसर की आशंका कम हो जाती है।

डॉ. पूर्विश पारिख