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फिल्म में दिखी खुद को खोजने की कोशिश

7 वर्ष पहले
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भारतभवन के छविगृह में रविवार को साप्ताहिक सिनेमा शृंखला के तहत कन्नड़ फिल्म ‘कुरमावतार’ का प्रदर्शन किया गया। इसका निर्देशन गिरीश कासरवल्ली ने किया। इस फिल्म में विचारों की उथल-पुथल में फंसे एक इंसान की कहानी दिखाई गई है। फिल्म का मुख्य किरदार रयारू अपने जीवन की तुलना गांधी से करता हुआ नजर आता है। यह भी कह सकते हैं कि रयारू फिल्म में गांधी का किरदार निभा रहा है। साल 2011 में बनी इस फिल्म को कन्नड़ में बेस्ट फीचर फिल्म के लिए ‘नेशनल फिल्म अवॉर्ड’ भी मिल चुका है।

फिल्म का स्टोरी प्लॉट

सामान्य जिंदगी जीने वाले रयारू के इर्द-गिर्द फिल्म की कहानी बुनी गई है। इसमें उसे एक ऐसे इंसान के रूप दिखाया गया है कि जो अपने आप को खोजने में जुटा रहता है। उसे अपनी प|ी, बच्चे और परिवार की कोई परवाह नहीं है, लेकिन वह अपनी नौकरी ईमानदारी के साथ करता है। जब उसे इत्तेफाक से एक सीरियल में खुद को खोजने वाले इंसान का किरदार करने का मौका मिलता है, तब से वह अपने जीवन की तुलना महात्मा गांधी से करने लगता है। वह खुद को पूरी तरह काम में उलझा लेता है। उसे परिवार की कोई जरूरत भी महसूस नहीं होती है। प्यार, रिश्ते उसके लिए कोई मायने नहीं रखते हैं। इसमें रयारू का किरदार डॉ. शिकारीपुरा कृष्णमूर्ति ने काफी खूबसूरती के साथ निभाया।

फिल्म \\\"कुरमावतार\\\" के एक दृश्य में अपनी शिष्याओं के साथ गांधीजी का किरदार।