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वेतन नहीं मिलने से कलाकार हट रहे पीछे

7 वर्ष पहले
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राष्ट्रीयसंस्कृत संस्थान, भोपाल कैंपस में नाट्य शास्त्र अनुसंधान केंद्र की स्थापना 2012 में की गई थी। इसके बाद तीन वर्षों में यहां अनेक स्तरीय मंचन हुए, लेकिन इससे जुड़े कलाकारों और कर्मचारियों को जनवरी माह से वेतन नहीं मिला। इसके बावजूद भी वे छह माह तक अभ्यास करते रहे। जब बिना वेतन काम करने का समय सितंबर तक खिंच गया तो कलाकारों ने आना बंद कर दिया। ऐसी स्थिति में यह केंद्र बंद होने की कगार पर गया है। केंद्र से जुड़े एक कलाकार ने बताया कि हमें जनवरी से वेतन नहीं मिला है। अब जब कलाकार इस केंद्र को छोड़ने जा रहे हैं तो राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान दिल्ली से एक दल यहां निरीक्षण के लिए रहा है।

संस्कृतनाटकों में शोध

केंद्रसे जुड़े कलाकार संजय द्विवेदी ने बताया कि संस्कृत नाटकों में शोध कहीं नहीं हो रहा है। ऐसे में भोपाल में सीमित संसाधनों में रहकर कलाकार काम कर रहे थे। यहां संस्कृत नाटकों में टेक्ट्स को लेकर भी शोध कार्य हो रहा था। श्री द्विवेदी ने बताया कि 3 जून से 26 जून तक ‘संस्कृत नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला’ भी यहां आयोजित की गई थी।

30बेहतरीन प्रस्तुतियां

नाट्यशास्त्रअनुसंधान केन्द्र, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन एक केन्द्र है, इसकी स्थापना 2012 में राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, सम विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति और प्रख्यात नाट्यशास्त्री प्रो. राधावल्लभ त्रिपाठी ने संस्थान के भोपाल कैंपस में की थी। इस नाट्य केन्द्र द्वारा संस्कृत के महान नाटककार कालिदास, भवभूति, भास, शूद्रक आदि के लगभग 15 नाटकों की 30 से अधिक प्रस्तुतियां पूरे भारत में की जा चुकी हैं। जिनमें राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली का 15वां भारत ‘रंग महोत्सव-2012’, उज्जैन का ‘कालिदास समारोह-2014 आदि प्रमुख हैं। नाट्यकेन्द्र के तीन भाग रंगमंडल, गानवृन्द और अनुसंधान है।

मुख्यमंत्रीको दे चुके ज्ञापन

केंद्रसे जुड़े कलाकार अनुसंधान केंद्र को बंद होने से बचाने के लिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, संस्कृति मंत्री सुरेंद्र पटवा, उच्च शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता, सांसद आलोक संजर, मुख्य सचिव को भी ज्ञापन दे चुके हैं। लेकिन कलाकारों की कोई नहीं सुन रहा। कलाकार इस पक्ष में नहीं हैं कि यह केंद्र बंद हो जाए। उनका मानना है कि इ