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डीएमएलटी के छात्र परेशान, काउंसिल में पंजीयन नहीं

7 वर्ष पहले
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डीएमएलटी(डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्नाेलाॅजी) करने वाले सैकड़ों छात्रों को डिप्लोमा के आधार पर कहीं काम नहीं दिया जा रहा है। इन छात्रों को अब या तो दोबारा डिप्लोमा करना पड़ रहा है या किसी अन्य फील्ड में नौकरी तलाशना पड़ रही है। मध्यप्रदेश में पैरामेडिकल काउंसिल का गठन वर्ष 2004 में हुआ, जिसके बाद पैरामेडिकल कोर्स करने वाले छात्र-छात्राओं का पंजीयन प्रारंभ हुआ। इसके पहले तक पैरामेडिकल कोर्स किसी भी यूनिवर्सिटी से मान्यता पर आधारित था। कोर्स करने के बाद किसी तरह का रजिस्ट्रेशन नहीं कराना होता था। काउंसिल बनने के बाद पैरामेडिकल से जुड़े डिग्री-डिप्लोमा का रजिस्ट्रेशन प्रारंभ हुआ और नियम बन गया कि डीएमएलटी या अन्य पैरामेडिकल कोर्स करने के बाद उसका पंजीयन काउंसिल में करवाना अनिवार्य है।

इस नियम में वर्ष 2004 से पहले पैरामेडिकल का कोर्स पूरा करने वालों के पंजीयन के लिए काउंसिल मान्यता प्राप्त संस्थानों के छात्रों का ही पंजीयन कर रही है। इसमें शर्त जोड़ दी गई है कि यह कोर्स दो साल का होना चाहिए, लेकिन वर्ष 2004 से पहले ज्यादातर विवि द्वारा डीएमएलटी का एक साल का कोर्स ही करवाया जाता था। इस एक साल का कोर्स काउंसिल मान्य नहीं कर रही है।

नहींकर पा रहे नौकरी

इंदौरके महाराजा यशवंतराव अस्पताल में हाल ही में पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती शुरू हुई है, लेकिन वर्ष 2004 से पहले डिप्लोमा करने वाले छात्र इन पदों के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा प्राइवेट पैथोलॉजी लेबोरेटरी में भी लैब टेक्नीशियन की नौकरी करने के लिए डिप्लोमा का पंजीयन होना अनिवार्य है, जिसकी वजह से ये सैकड़ों छात्र प्राइवेट सेक्टर की नौकरी भी नहीं कर पा रहे हैं। लैब टेक्निशियन बनने का ख्वाब लिए पैरामेडिकल कोर्स करने वाले कई लोगों ने पंजीयन होने से दूसरी फील्ड की नौकरी जॉइन कर ली है।

मजबूरी में कर रहे दोबारा डिप्लोमा