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बचपन में पेंटिंग करने के शौक से शुरू हुआ सफर पहुंचा आर्ट गैलेरी तक
चित्रकारी, संगीत लेखन में बनाई अपनी पहचान
कोलार के अकबरपुर में रहने वाली मधुबाला पांडे को अपने संगीत, लेखन और चित्रकारी के शौक ने कलाकार के रूप में स्थापित कर दिया है। उन्हें कई साहित्य संस्थाओं द्वारा अलग-अलग मौके पर विभिन्न सम्मान दिए गए हैं। कला साधना अलंकरण से नवाजा गया है। उनकी कविताएं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं।
बीए की पढ़ाई कर चुकीं 55 वर्ष की मधुबाला पांडे वर्तमान में दीप आर्ट गैलेरी चलाती हैं। उनका मानना है कि उनको मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त है। इसलिए वे इन कलाओं में माहिर हैं। मधुबाला पांडे बताती हैं कि उनको बचपन से ही पेंटिंग करने का शौक था। वे अपने स्कूल के दिनों से ही विभिन्न वाटर कलर से अपनी कल्पनाओं को रंग भरकर उन्हें जीवंत करती थीं। उनके लिए संगीत, लेखन और चित्रकारी जिंदगी है। इसके बिना वे अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकती हैं। उनकी सबसे खास कलाकृति मधुवन है। इस पेंटिंग में एक ऋषि कन्या वन में बैठी अपने बाल सुखा रही है। इस पेंटिंग को मधुवन का नाम दिया गया है। उन्होंने इस नाम से एक पुस्तक लिखी है, जिसमें उनके द्वारा लिखित गीत गजल का संग्रह है। पुस्तक के कवर पेज पर पेंटिंग को छापा गया है।
क्लासिकलम्यूजिक में भी हासिल है महारथ
मधुबालापांडे को साहित्य के साथ ही संगीत का भी शौक है। उन्हें दोनों ही विधाओं में महारथ हासिल है। क्लासिकल और सुगम संगीत में उन्होंने कोलकाता म्यूजिक एंड आर्ट सोसायटी से संगीत में प्रशिक्षण प्राप्त किया है और लगातार उनका इस क्षेत्र में दखल जारी है।
मधुवन का विमोचन आज
मधुबाला पांडे ने चित्रकारी और लेखन में भी खुद को स्थापित किया है। रविवार को उनकी काव्यकृति मधुवन पुस्तक का विमोचन होने जा रहा है। मधुवन में मधुबाला पांडे द्वारा लिखे गीत और गजल का संग्रह प्रकाशित किया गया है। कार्यक्रम फूड क्राफ्ट में सुबह 11.30 बजे होगा। उसकी अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्य कार लेखक एवं कवि डॉ. हुकुमपाल सिंह विकल करेंगे।