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पहली बार भेल में रामलीला मेले का आयोजन

7 वर्ष पहले
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गोविंदपुरा स्थित रामलीला मैदान में पहली बार मेले का आयोजन किया गया है। इस मेले में सभी प्रकार के स्टाल आकर्षक झूले लगाए गए हैं। इसके अलावा मेले में रामलीला मंचन 10 दिन तक चलेगा। वहीं पिपलानी और बरखेड़ा में भी रामलीला का मंचन हो रहा है, लेकिन दर्शकों की उपस्थिति काफी कम है। तीनों रामलीला समितियों के पास स्वयं का टेंट, माइक, कलाकारों की ड्ेस, हथियार आदि भरपूर सामान होने के बाद भी देखने वालों की संख्या काफी कम है। जबकि भेल क्षेत्र ही ऐसा है, जहां रामलीला का आयोजन पिछले 55 साल से लगातार चल रहा है।

गोविंदपुरा रामलीला समिति के पदाधिकारी आरए गुप्ता टीआर मिश्रा ने बताया कि भेल में रामलीला का आयोजन हर साल शारदीय नवरात्रि के मौके पर िकया जाता है। इसका समापन दशहरा उत्सव राम के राज्याभिषेक के साथ होता है। रामलीला में दर्शकों की लगातार कम हो रही भीड़ को देखते हुए इस बार रामलीला मेले का भी आयोजन गोविंदपुरा में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दर्शकों की उदासीनता का कारण दूरदर्शन युग हावी होना है। जो समय रामलीला का होता है, उस समय लोग टीवी देखते हैं।

बंदनहीं हो सकती रामलीला

भेलक्षेत्र ही आज के समय में रामलीला को लगातार जारी रखे हुए है। पुराने समय के अनुसार ही इसका संचालन हो रहा है। इसमें काम करने वाले और कलाकार सभी भेल कर्मचारी ही हैं। समिति के संचालकों के अनुसार रामलीला कार्यक्रम बंद नहीं किया जा सकता है, क्योंकि इसमें काम करने वाले बचपन से चला रहे हैं। समितियों को उम्मीद है कि दर्शक एक बार फिर पुरानी तर्ज पर चल रहीं रामलीलाओं के प्रति आकर्षित होंगे।

{रामलीला देखने वालों की संख्या बढ़ाने के लिए लगाया मेला {कई धार्मिक, अन्य सामान के स्टाल और बड़े हवाई झूले {बड़े स्तर पर रामलीला का आयोजन, लेकिन दर्शक नहीं पहुंच रहे {आयोजक ही दर्शक बनकर बैठ रहे हैं {रामलीला मैदान के आसपास रहने वालों की संख्या भी काफी कम {साज-सज्जा सहित रामलीला का सभी सामान समितियों के पास खुद का