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कूलरों के खस पैड में भी पनप रहे हैं डेंगू के वायरस

7 वर्ष पहले
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शहरमें गर्मी के दौरान इस्तेमाल किए गए कूलर अगली गर्मी में डेंगू के फैलने की वजह बन सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग के सर्वे में सामने आया है कि 90 फीसदी कूलरों में लगे खस के पैड में डेंगू के सीरोटाइप डेन-2 और 3 वायरस मौजूद हैं। ये वायरस लार्वीसाइड से भी खत्म नहीं होते हैं। ऐसे में पुराने पैड को जलाकर ही इन्हें खत्म किया जा सकता है। ऐसा करने पर गर्मी शुरू होते ही यह वायरस सक्रिय हो जाएंगे, जिससे शहर में डेंगू के हालात बेकाबू हो सकते हैं।

शहर में इस साल डेंगू से 13 लोगों की मौत हुई है। इसका गंभीर पहलू यह भी है कि इसी साल यहां डेन-2 अौर 3 वायरस की मौजूदगी भी मिली है। इन वायरस की डेंगू का संक्रमण फैलाने की क्षमता डेन-1 वायरस की तुलना में बहुत अधिक होती है। इंटीग्रेटेड डिसीज सर्विलांस प्रोग्राम (आईडीएसपी) की रिपोर्ट में सामने अाया है कि ये दो वायरस अधिकांश कूलरों में लगी पुरानी खस में मौजूद हैं। इसे देखते हुए प्रभारी सीएमएचओ डॉ. जीआर मैहर ने जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. केबी वाजपेयी से कहा है कि अभियान चलाकर खस के ऐसे पैड नष्ट करवाए जाएं। मैहर ने यह भी कहा है कि शहर में लार्वा सर्वे बंद किया जाए।