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चेहरा पुराना या नया, तलाश कल से

7 वर्ष पहले
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नगर निगम चुनाव में पार्षद पद के प्रत्याशी के पास यदि जाति प्रमाणपत्र नहीं हुआ तो वे पर्चा दाखिल करते समय इस संबंध में शपथ पत्र पेश कर सकते हैं। प्रमाणपत्र बन जाने के बाद वे इसे पेश कर सकते हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को पत्र भेजकर स्थिति स्पष्ट की है।

{अब तक नामों पर विचार नहीं, मंडल स्तर से मंगाए संभावित नाम।

{बूथ स्तर पर सदस्यता अभियान शुरू

{बूथ का जिम्मा संभालने हर बूथ पर कार्यकर्ताओं की कमेटी बनाई।

{वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने में कार्यकर्ताओं की भागीदारी

{फर्जी नाम हटाने के लिए कार्यकर्ताओं को आपत्ति पेश करने को कहा।

जैसा- भाजपा जिलाध्यक्ष आलोक शर्मा ने बताया।

{सभी वार्डों में कार्यकर्ताओं की बैठक लेकर हर श्रेणी के संभावित प्रत्याशी की सूची तैयार।

{सदस्यता अभियान शुरू

{हर बूथ पर 50 सदस्यों की टीम

{नाम जोड़ने की प्रक्रिया में कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी

{संदिग्ध फर्जी नामों पर आपत्ति पेश करने की रणनीति

जैसा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष पीसी शर्मा ने बताया।

नगर संवाददाता|भोपाल

नगरनिगम चुनाव में पार्षद पदों के उम्मीदवार तय करने के लिए भाजपा- कांग्रेस ने तैयारी शुरू कर दी, लेकिन दोनों ही पार्टियों को 10 दिसंबर को वार्ड आरक्षण होने का इंतजार है। इसके बाद ही पार्षद पद के दावेदारों की स्थिति स्पष्ट होगी। कांग्रेस और भाजपा में बुधवार शाम से प्रत्याशियों के पैनल बनाने का काम शुरू होगा। वर्तमान पार्षदों को टिकट देने के सवाल पर दोनों का तर्क है कि आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि पार्षद पद का प्रत्याशी पुराना चेहरा होगा या नया।

दोनों दल युवा स्थानीय उम्मीदवारों को पार्षद पद के लिए मैदान में उतारने की बात कह रहे हैं लेकिन मौजूदा पार्षदों को टिकट देने के सवाल पर मौन हैं। प्रत्याशी भले तय हों लेकिन निगम चुनाव को लेकर कांग्रेस-भाजपा ने बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की जमावट शुरू कर दी है। दोनों दल सदस्यता अभियान चला रहे हैं। भाजपा ने बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की समिति बना दी है। कांग्रेस भी बूथ स्तर पर कमेटी बना रही है। भाजपा जिलाध्यक्ष आलोक शर्मा कहते हैं कि पार्षद प्रत्याशी के नामों के पैनल मंडल स्तर से ही मंगाए जा रहे हैं। युवा स्थानीय चेहरों को पैनल में शामिल किया जाएगा। ऐसे ही