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पति का शक दूर करने बच्चों का डीएनए टेस्ट कराने की मांग

7 वर्ष पहले
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नसं. भोपाल| एकमहिला ने शादी के सात साल बाद पति द्वारा मारपीट करने और बच्चों को किसी अन्य पुरुष का बताने की शिकायत महिला थाने में की है। महिला ने पति का शक दूर करने के लिए पुलिस से बच्चाें का डीएनए टेस्ट कराने का अनुरोध किया है।

हबीबगंज थाने की काउंसलर कविता मौर्या ने बताया कि एक महिला ने शिकायत की थी कि उसका पति शादी के सात साल बाद अपने दोनों बच्चों को अपनाने से इंकार कर रहा है। इस मामले में पति से पूछताछ की गई तो पता लगा कि पति अपनी प|ी के साथ नहीं रहना चाहता था, इसलिए उससे छुटकारा पाने के लिए यह आरोप लगाया है।

प|ीके चरित्र पर विश्वास नहीं : महिलाथाने की काउंसलर रीता तुली ने बताया कि एक युवती की शादी 16 जून 2014 को हुई थी। शादी के तुरंत बाद वह गर्भवती हो गई। अभी युवती को पांच माह का गर्भ है और पति और ससुराल वालों ने युवती को घर से निकाल दिया। पति का कहना है कि उसकी प|ी के गर्भ में पल रहा बच्चा उसका नहीं है।







इस मामले में काउंसलिंग चल रही है। रीता तुली ने बताया कि जटिल हो चुके इस मामले में उन्होंने बच्चा होने के बाद डीएनए करने की सलाह दी है।



वहीं अन्य मामले में एक युवती ने शिकायत की थी उसके शादी 30 जनवरी को हुई थी। शादी के 15 दिन बाद पति और ससुराल वालों से मतभेद होने के बाद वह ससुराल नहीं गई। उसे एक माह बाद पता चला कि वह गर्भवती है। तो उसने इसका जिक्र पति से फोन पर किया, लेकिन उसने उस समय चुप रहने कहा और सब कुछ शांत होने के बाद लेने आने का वादा किया। जब वह नहीं आया तो सास से बात की। सास ने साफ कह दिया कि गर्भ में पल रहा बच्चा उनके बेटे का नहीं है। इसलिए मजबूरी में परामर्श केंद्र में शिकायत करना पड़ी। श्रीमती तुली ने बताया कि इस मामले में उन्होंने ससुराल पक्ष को बुलाकर काउंसलिंग की और शक दूर करने के लिए बच्चे का डीएनए करने की सलाह दी गई थी, जिस पर दोनों पक्ष राजी हो गए थे। मामला अभी अंडर काउंसलिंग है।



इस मामले में महिला सेल की अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अरुणा मोहन राव का कहना है कि बच्चों को अपनाने से इंकार करने के मामलों में काउंसलिंग थोड़ा हटकर की जाती है। उन्होंने बताया कि काउंसलिंग के दौरान यह जानने की कोशिश की जाती है कि आरोप लगाने के पीछे कोई अन्य कारण तो नहीं है। जरूरत पड़ने पर महिला पुलिस को मामले की पूरी जांच करने के लिए भेजा