शक्ति का संतुलन भक्ति से: राजेश्वरानंद
भोपाल| भक्तवह है, जो अपने भीतर दुर्गुणों के रूप में बैठे शत्रुओं को साधना संयम के जरिए परास्त कर दे। संत राजेश्वरानंद ने यह बात मानस भवन में सोमवार को कही। वे पं. गोरेलाल स्मृति समारोह में प्रवचन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि शक्ति का संतुलन बनाए रखने के लिए भक्ति का होना जरूरी है।