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खराब टेबलेट भी नहीं किए वापस

7 वर्ष पहले
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भोपालस्थित जिला पंचायत कार्यालय में ऐसे 4000 टेबलेट्स आए थे, जो अब बेकार पड़े हैं। प्रदेश भर में हजारों की संख्या में ऐसे टेबलेट्स भी हैं, जिन्हें कभी इस्तेमाल ही नहीं किया गया और वे सील पैक रखे हुए हैं।

अकेले भोपाल में 1000 से ज्यादा अनयूज्ड टेबलेट्स पुराने जिला पंचायत कार्यालय में रखे हैं। शासन के नियमानुसार किसी भी कार्य के लिए कोई चीज भेजते हैं ताे उसमें 10 प्रतिशत अधिक सामान भेजा जाता है। इसका कारण यह है कि अगर कोई सामान खराब, चोरी या खो जाए तो काम प्रभावित हो। अब यहां 200 के लगभग टेबलेट ऐसे हैं, जिनकी पैकिंग भी नहीं खोली गई है और उन्हें कबाड़ में रख दिया गया है। शासन के रुपयों के दुरुपयोग का यह एक बड़ा उदाहरण है।

3000 का एक

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बेल के माध्यम से ये टेबलेट खरीदे थे। एक टेबलेट की कीमत 3000 रु. है। इन्हें महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के लिए इस्तेमाल किए जाने की योजना थी, लेकिन उपयोग नहीं हो पाएगा।

वारंटी पीरियड भी खत्म हुआ

जनगणनाके दौरान इन टेबलेट्स में खराबी सामने आई थी। ग्वालियर, चंबल संभाग में भी ऐसा हुआ था। चंबल संभाग के कुछ जिलों में टेबलेट भेजने की जिम्मेदारी ग्वालियर जिला पंचायत के अधिकारियों को दी गई थी। ऐसे में इन जिलों में लगभग 1800 टेबलेट भेजे गए थे। इसमें श्योपुर में 140, शिवपुरी में 200, गुना में 900, अशोकनगर में 580 टेबलेट भेजे गए, लेकिन वहां करीब 500 टेबलेट काम के दौरान खराब हो गए। जिला पंचायतों से वे टेबलेट वापस ग्वालियर भेज दिए गए। उस समय ये टेबलेट वारंटी पीरियड में थे और इनकी रिपेयरिंग बिल्कुल फ्री की जानी थी, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण इन टेबलेट्स को रिपेयर कराने के लिए भेजा ही नहीं और इन्हें भी अन्य टेबलेट्स के साथ रखवा दिया।

एमबी रैम है टेबलेट की।

जीबी इंटरनल मेमोरी है।

है ऑपरेटिंग एंड्राॅयड।