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10 हजार से अधिक पेंशन है तो नहीं मांग सकते भरण पोषण
नसं. भोपाल| बुजुर्गोंके लिए बने भरण-पोषण अधिनियम उनके लिए बेमानी साबित हो रहे हैं। जिन बुजुर्गों की पेंशन 10 हजार रुपए से अधिक है, वे अपने बच्चों से भरण पोषण लेने के लिए सरकार की मदद नहीं मांग सकते। उनके मामले वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण अधिनियम 2007 के तहत दर्ज नहीं किए जा रहे हैं। ऐसा अधिकारियों द्वारा अधिनियम की गलत व्याख्या किए जाने की वजह से हो रहा है। यह आरोप वरिष्ठ नागरिक कल्याण आयोग ने लगाया है। इसका प्रमाण इस बात से मिल रहा है कि वर्ष 2014 में केवल 6 शिकायतें की गईं, इनमें से 4 मामले में ही सुनवाई ह़ुई और 2 मामले अभी लंबित हैं। अधिकारियों का तर्क है कि इस अधिनियम के तहत 10 हजार से अधिक पेंशन पाने वाले बुजर्गों के आवेदन ग्राह्य नहीं होते।
जबकि हकीकत यह है कि अधिनियम में ऐसा कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। चूंकि शिकायत करने वाले बुजुर्गों को कोर्ट अधिकतम 10 हजार रुपए तक का भरण-पोषण देने का आदेश जारी कर सकता है, इसलिए अफसरों ने इतनी राशि की पेंशन पाने वाले बुजुर्गों के आवेदन लेना ही बंद कर दिया है।
सामाजिक न्याय विभाग में कई बुजुर्गों ने बहू-बेटे की शिकायत की कि वे भरण पोषण के लिए पैसे नहीं देते। इस पर मामला दर्ज करने के बजाए बुजुर्गों उनके बच्चों की काउंसलिंग कराई गई। बच्चों को माता-पिता को परेशान नहीं करने की हिदायत देकर केस नस्तीबद्ध कर दिए गए। सेवानिवृत्त टीचर एस के शर्मा ने बताया कि बहू-बेटे उनकी पेंशन छुड़ा लेते हैं। लेकिन अफसरों ने उनका प्रकरण केवल इसलिए दर्ज नहीं किया, क्योंकि उन्हें 10 हजार रुपए पेंशन के रूप में मिलते हैं। इसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत मानवाधिकार आयोग और बुजुर्ग आयोग में की है। इधर वरिष्ठ नागरिक कल्याण आयोग के अध्यक्ष वीजी