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एमबीबीएस में इबोला और स्वाइन फ्लू भी पढ़ाएंगे
अबएमबीबीएस के स्टूडेंट्स को इबोला, स्वाइन फ्लू, बर्ड फ्लू् जैसी संक्रामक बीमारियों की पहचान और उनका इलाज करना पढ़ाया जाएगा। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) एमबीबीएस के सिलेबस में बदलाव कर रही है। एमबीबीएस कोर्स के नए सिलेबस में आधा दर्जन प्रकार की पैथोलॉजिकल और रेडियोलॉजिकल जांचों के अध्ययन को शामिल किया जा रहा है। एमसीआई ने एमबीबीएस का नया सिलेबस बनाना शुरू कर दिया है, जो मई 2015 में जारी होगा।
काउंसिल अध्यक्ष डॉ. जयश्रीबेन मेहता ने बताया कि अस्पतालों में नई-नई बीमारियों के मरीज पहुंच रहे हैं। इन बीमारियों के इलाज के बारे में अधिकांश डॉक्टरों को जानकारी नहीं है। इस कारण इन मरीजों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। जबकि इन बीमारियों का इलाज, शुरूआत में ही उसकी पहचान होने पर संभव है।
इस कारण अब स्वाइन फ्लू, इबोला, हेपेटाइटिस बी, सी के संक्रमण की पहचान और उसके इलाज को एमबीबीएस के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। डॉ. मेहता ने बताया कि एमबीबीएस के अलावा पीजी कोर्सेस के सिलेबस को भी रिवाइज किया जाएगा। इसके लिए सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों के डीन से सुझाव मांगे हैं।
नए सिलेबस में चैप्टर बढ़ेंगे
डॉ. मेहता ने बताया कि एमबीबीएस के नए सिलेबस में नई बीमारियों की पहचान और इलाज के 8 चैप्टर रहेंगे। जो एडीशनल होंगे। फिलहाल काउंसिल के बोर्ड ऑफ गवर्नर ने वर्तमान सिलेबस में चैप्टर कम करने पर रोक लगा रखी है। इस वजह से वर्तमान सिलेबस में किसी प्रकार की कांट-छांट नहीं की जाएगी।
सोनोग्राफी और ईसीजी रिपोर्ट रीडिंग ट्रेनिंग
काउंसिल अफसरों ने बताया कि एमबीबीएस के नए सिलेबस में सोनोग्राफी और ईसीजी रिपोर्ट रीडिंग की ट्रेनिंग भी छात्रों को दी जाएगी। देखने में आया है कि प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर के अस्पतालों में दोनों प्रकार की जांचें होने के बावजूद नए डॉक्टर्स इनकी रिपोर्ट को समझने में परेशानी होती है। इसके लिए विशेषज्ञ की मदद लेना पड़ती है। नए सिलेबस के तहत सोनोग्राफी और ईसीजी रीडिंग की ट्रेनिंग होने से नए एमबीबीएस डॉक्टर, मरीज की रिपोर्ट देखकर उसका इलाज कर सकेंगे।