- Hindi News
- दो साल बाद भी शुरु नहीं हो सकी वर्चुअल क्लासेज
दो साल बाद भी शुरु नहीं हो सकी वर्चुअल क्लासेज
लगाए गए सेटअप का नहीं मिल रहा है छात्रों को कोई लाभ
मुंगावली| सेटेलाइटके माध्यम से सीधे ही कक्षाएं संचालित करने के लिए करीब डेढ़ साल पहले सेटअप तो लग गए। फिर भी वर्चुअल क्लास में पढऩा छात्रों के लिए दिवास्वप्न बना हुआ है। वहीं जिम्मेदार भी इस ओर कोई गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
वर्चुअल क्लास के लिए तहसील के गणेश शंकर विद्यार्थी महाविद्यालय और उत्कृष्ट स्कूल का चयन किया गया। जिनमें सेटेलाइट के माध्यम से भोपाल और दिल्ली सहित के विषय विशेषज्ञों द्वारा ऑनलाइन पढ़ाई कराई जाना थी। लेकिन सेटअप लगने के बाद भी ऑनलाइन पढ़ाई की बात तो दूर, एक भी दिन कक्षा शुरु नहीं हुई। नतीजतन छात्र लंबे समय से इनके शुरु होने का इंतजार कर रहे हैं।
इसतरह होना थी पढ़ाई
इनकक्षाओं को सीधे ही राजधानी से संचालित किया जाना है। जहां से विषय विशेषज्ञ ऑनलाइन पढ़ाते हुए छात्र-छात्राओं को सेटेलाइट के माध्यम से पर्दे पर दिखते। वहीं छात्र भी उस विषय पर शंका के समाधान के लिए प्रश्न कर सकता। वहीं विषय विशेषज्ञ ऑनलाइन ही छात्रों के सवालों के जबाव देते। लेकिन डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी कक्षा की बात तो दूर, उस कमरे में भी नहीं घुस पाते।
क्लास शुरू कराने लिखा पत्र
^सेटअपलगने के बाद वर्चुअल क्लास चालू होने से बार-बार पत्र लिखे जा रहे हैं। इससे कि वर्चुअल क्लास शीघ्र शुरु हो सके। श्यामरावधर्मपुरी कर, प्राचार्यउत्कृष्ट विद्यालय मुंगावली।
^सेटअपमें सिग्नल नहीं पाने से यह समस्या बनी है। मैंने वरिष्ठ अधिकारियों से इसके लिए चर्चा की है। वहीं तकनीकी टीम को भी उपकरणों को फिर से सेट करने के लिए बुलाया गया है। डॉ.आरएसरघुवंशी, प्राचार्यगणेश शंकर विद्यार्थी महाविद्यालय मुंगावली।
इससे यह होता फायदा
}स्कूलके शिक्षकों के साथ-साथ छात्रों को विषय विशेषज्ञों से पढऩे का मौका मिलता।
}विषय विशेषज्ञ भी सब्जेक्ट को बारीकी से समझाते, जिससे शिक्षकों को भी पढ़ाने में मदद मिलती।
}एक दम नए तरह के माहौल से छात्रों में भी विषय को समझने में उत्सुकता बढ़ती।
}प्रश्न करने से ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों में बोलने की झिझक खत्म होकर आत्मविश्वास बढ़ता।