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कलेक्टोरेट में पेड़ उगे, आईजी ऑफिस में गिर रही छत
डीबीस्टार टीम ने शहर की उन इमारतों का भी जायजा लिया, जिनमें कलेक्टोरेट दूसरे कार्यालय लग रहे हैं। सबसे पहले कलेक्टोरेट कार्यालय के हाल देखे तो सामने से एकदम ठीक नजर अाने वाली यह इमारत पीछे से खराब दिख रही है। इस इमारत के पीछे की तरफ दाएं कोने में दीवार पर पेड़-पाैधे उग आए हैं, जिससे दीवार खराब हो गई है। गौरतलब है कि पिछले साल तक इस इमारत की छत भी रिसती थी, लेकिन उस मामले को डीबी स्टार ने उठाया तो अब पूरी छत को प्लास्टिक की चद्दर से ढक दिया गया है। इसी इमारत से थोड़ी दूरी पर पुलिस विभाग के आईजी डीआईजी बैठते हैं। जिस इमारत में इनका दफ्तर है, वहां भी हालत ठीक नहीं है। यहां पोर्च के ऊपर बने छज्जे से प्लास्टर के टुकड़े गिरने लगे हैं। इस कैम्पस में जितनी भी इमारतें हैं, उन सभी के मेंटेनेंस का जिम्मा पीडब्ल्यूडी के पास है। डीबी स्टार ने जब इस संबंध में अधिकारियों से संपर्क किया तो सभी जवाब देने से बचते नजर आए। यदि इन इमारतों को सहेजकर रखा जाए तो ये इमारतें लंबे समय तक कायम रहेंगी।
मेंटेनेंस का काम पीडब्ल्यूडी के पास
पूरे शहर में सरकारी इमारतें तो बहुत हैं, लेकिन इनमें से 59 इमारतें ऐसी हैं, जो बड़ी और महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इनमें से करीब 28 बिल्डिंगों के मेंटेनेंस का काम पीडब्ल्यूडी के पास है, जबकि दूसरे नंबर पर सीपीए का नंबर आता है, जिसके पास वल्लभ भवन, सतपुड़ा और विंध्याचल भवन जैसी बड़ी इमारतें हैं। वहीं कोलार डेम किनारे बना वॉल्मी भवन, अरेरा हिल्स के माध्यम भवन, ऊर्जा भवन, एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट आदि में मेंटेनेंस का काम यहां बैठने वाले डिपार्टमेंट ही देखते हैं। सबसे बुरी हालत पीडब्ल्यूडी के भवनों की है, जिनमें मेंटेनेंस हर साल किया जाता है।
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नियमित मेंटेनेंस होता है
सीपीएके पास जितनी भी इमारतें हैं, उनमें पूरे वर्ष में एक बार मेंटेनेंस जरूर किया जाता है। हमारें यहां का स्टाफ नियमित रूप से इन बिल्डिंगों का निरीक्षण करता है और जरूरत पड़ने पर वहां मेंटेनेंस किया जाता है।
सीएसजायसवाल, एक्जीक्यूटिवइंजीनियर, सीपीए
खराब होती सदर मंजिल
जिस सदर मंजिल में नगर निगम दफ्तर लग रहा है, वह दिन दिन खराब होती जा रही है। दरअसल इस इमारत में किसी किसी हिस्से में रिनोवेशन होता रहता है, लेकिन जितना रिनोवेशन होता है, उतनी ही यह खराब होती जाती है। सदर मंजिल के