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उपनगर की नई पीढ़ी को सिंधियत से जोड़ रही सिंधु
संस्था -सिंधु|स्थापना - 23 साल पहले|
संत हिरदाराम नगर भास्कर.भोपाल
सेवाभावीसंस्थाओं के साथ समाज में अब कई सांस्कृतिक संस्थाएं काम कर रही हैं, जो सिंधियत को बनाए रखने के लिए भी जानी जाती हैं। ऐसी ही एक सांस्कृतिक संस्था है सिंधु। इस संस्था की स्थापना दो दशक पहले कुछ कलाकारों और साहित्यकारों ने मिलकर की थी, तब से आज तक सिंधी गायन परंपरा को बनाए रखने की कोशिश संस्था कर रही है। सिंधु नई पीढ़ी तक सिंध गायन और सिंध की संस्कृति पहुंचाने के लिए एक सेतु का काम कर रही है।
संस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि संस्था के गठन के पहले दिन से हमारा उद्देश्य मातृभाषा का उत्थान करना है। उन साहित्यकारों, गायकों को समाज की नई पीढ़ी तक पहुंचाना है, जो सिंध भाषा में अग्रणीय रहे हैं। संस्था समय-समय पर सिंधी गायकों, साहित्यकारों की जयंती, पुण्य तिथि उनके ही अंदाज में मनाती है। गायक को संस्था के सिंधी गायन के कार्यक्रमों में याद किया जाता है। साहित्यकारों को साहित्यिक गोष्ठियों और कवि सम्मेलनों, मुशायरों में आदराजंलि अर्पित की जाती है।
नएकलाकारों का मंच
इससेसिंधी के नए कलाकारों को भी मंच और प्रोत्साहन मिलता है। संस्था के आयोजन स्तरीय कार्यक्रमों की परंपरा का निर्वहन करते हैं। हर साल एक फरवरी को सिंधी कोकिला भगवंती नावाणी की याद में कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। 22 जुलाई को सिंधी के शीर्ष साहित्यकार नारायण श्याम की याद में कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।
सामूहिकनेतृत्व का संचालन
संस्थाकी खासियत यह है कि इनका संचालन सामूहिक नेतृत्व अपने संसाधनों पर होता है। किसी तरह की कोई प्रबंध समिति वजूद में नहीं है। सिंधी साहित्यकार मिलजुलकर सालों से संस्था को चला रहे हैं। संस्था के मंच पर देश के कई नामी सिंधी कलाकारों को भी संतनगर को सुनने का मौका मिला है। गौरतलब है कि सिंधु संस्था द्वारा समय-समय पर और भी कई तरह के आयोजन किए जाते हैं। जिसमें समिति सदस्य पूर्ण सेवा भाव से अपना सहयोग प्रदान करते हैं।
उपनगर में लंबे समय से समाज सिंधियत के उत्थान के लिए प्रयासरत सिंधु संस्था अपने उत्कृष्ट कार्यों के लिए जानी जाती है। परंपराओं को जीवित रखने उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं...
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