वेटेज में फंस रहे हैं पीजी आवेदक
अतिथिविद्वान के पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन करने वाले पीजी आवेदक वेटेज के चक्कर में फंस गए हैं। नेट, पीएचडी तथा एमफिल का वेटेज मिलने के बाद भी कुछ आवेदकों के मार्क्स पीजी आवेदकों के बराबर नहीं हैं। मेरिट में ऊपर होने के बाद भी पीजी आवेदकों का सिलेक्शन नहीं किया गया। नियुक्ति से वंचित आवेदकों ने इसकी शिकायत उच्च शिक्षा विभाग के अफसरों से की है। प्रदेशके कॉलेजों में वर्ष 2013-14 में पढ़ा रहे अनेक अतिथि विद्वानों के साथ उच्च शिक्षा विभाग ने धोखा कर दिया है। गत अगस्त माह में प्रदेश के विभिन्न कॉलेजों में यूजी छात्रों को वर्ष 2014-15 में पढ़ाने के लिए अतिथि विद्वानों से आवेदन मंगाए गए। इसमें पीएचडी, नेट, एमफिल के साथ पीजी करने वालों को मौका दिया गया, लेकिन चयन में ज्यादा अंक वाले पीजी आवेदकों की जगह कम वाले पीएचडी, नेट आवेदकों को मौका दिया गया है। दरअसल, विभाग की गाइडलाइन में इस साल परिवर्तन किया गया है, जिसमें पीएचडी एवं नेट वाले आवेदकों को फर्स्ट कैटेगरी में रखा गया है। पीएचडी वाले आवेदकों को सेकंड, एमफिल वालों को थर्ड तथा पोस्ट ग्रेजुएशन वाले आवेदकों को फोर्थ कैटेगरी में रखा गया है।
अनुभवके अंक भी जुडतेे हैं
अतिथिविद्वानों के चयन में अनुभव के अंक भी दिए जाते हैं। नियुक्ति में अतिथि विद्वान को हर साल के अनुभव के चार अंक मिलते हैं। अनेक पीजी आवेदक तो इस कारण चयन से वंचित हो गए, क्योंकि उन्होंने जिस जिले का कॉलेज चुना था, उसकी मेरिट हाई चली गई। लेकिन जिस जिले को वे नहीं चुन पाए, उसकी मेरिट काफी कम रही। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि विभाग ने इस बार केवल दस कॉलेज ही च्वॉइस फिलिंग के लिए दिए थे।
^नंबर ज्यादा,मेरिट में नाम ही नहीं
मेरेपोस्ट ग्रेजुएशन के परसेंटेज उन आवेदकों से ज्यादा हैं, जिन्हें पीएचडी नेट के वेटेज मिले हैं। फिर भी उनका चयन हो गया।
अरुणसिंह, शिकायतकर्ता
^दोहरा लाभदेना गलत है
उच्चशिक्षा विभाग की अतिथि विद्वान की मेरिट में नेट तथा पीएचडी वाले आवेदकों को दोहरा लाभ दिया गया है। इस वजह से मेरिट में आने वाले पीजी आवेदकों को वरीयता नहीं मिल पाई। निर्मलसिंह सेंगर, शिकायतकर्ता
^वरीयता देखीगई है
भर्तीनियमों में वरीयता का कॉलम रखा गया था। पीजी छात्रों की भी नियुक्ति की जा रही है, लेकिन उनका क्रम सबसे नीचे है। आगे की नियुक्ति में भी वरीयता के हिसाब से ही