संस्था - विविध कला विकास समिति
संस्कृति की पहचान बनाए रखना है संस्था की प्राथमिकता
पुलिसप्रशासन द्वारा पूरे शहर में जगह-जगह पुलिस सहायता के लिए बीट नंबर वॉल पर लिखे गए हैं, लेकिन भेल क्षेत्र में अब बीट नंबर काफी पुराने होने से धूमिल हो चुके हैं। धुंधले हाेने से नजर नहीं आते। ऐसे में यदि कोई किसी हादसे का शिकार हो जाए तो उसे पुलिस की मदद ले पाना मुमकिन नहीं होगा। गौरतलब है कि पूर्व में पुलिस द्वारा मुख्य मार्गों की दीवारों पर पुलिस के बीट नंबर अंकित कराए गए थे। इसका मकसद था कि जरूरत पड़ने पर पीड़ित व्यक्ति तुरंत पुलिस से संपर्क कर सके। सबसे बड़ी परेशानी सड़क पर दुर्घटना या जरूरत के समय होती है, जब इमरजेंसी नंबर के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। पांच साल पहले पुलिस थाने और बीट के फोन नंबर जगह-जगह लिखे गए थे। धीरे-धीरे बीट नंबर की जगह टीआई और पुलिस थाने के फोन नंबर रह गए, लेकिन अब कई स्थानों से यह नंबर भी गायब हो चुके हैं। रहवासियों के अनुसार नगर निगम ने कई जगह कॉलोनी या संस्थान के अलावा प्रमुख स्थान की जानकारी के लिए ऊंचे खंभों पर बोर्ड लगाए हैं, लेकिन यह बोर्ड उसी स्थान के करीब हैं, जिसकी जानकारी उस पर दी गई है। उदाहरण के तौर पर चेतक ब्रिज या रायसेन से आने वाले को इसरो या एम्स जाना है तो उसे कई जगह इन दोनों संस्थानों के बारे में रुक कर पूछना पड़ेगा। अगर चेतक ब्रिज और रायसेन रोड पर इन संस्थानों के बारे में जानकारी देने के बोर्ड लगा दिए जाएं तो लोगों की परेशानी कम हो सकती है।
अस्पतालोंके भी बोर्ड लगाना जरूरी
रहवासियोंके अनुसार भेल क्षेत्र में वैसे कोई भी प्रमुख सरकारी अस्पताल नहीं है। इस कारण लोगों को इमरजेंसी में छोटे-बड़े अस्पतालों की जानकारी तुरंत चाहिए होती है। कई बार ऐसा होता है कि इधर-उधर भागने के बाद भी सिर्फ 1250 और हमीदिया अस्पताल ही जाना पड़ता है। इसी प्रकार अन्य कई जरूरी संस्थान हैं, जिनकी सार्वजनिक जानकारी देना जरूरी है।
{भेल के वरिष्ठ अधिकारियों की 55 वर्ष पुरानी संस्था {नाटक रामलीला के द्वारा किया जाता है लोगों को जागरूक
अपनी संस्कृति को बचाए रखना हर समाज का दायित्व होता है, यह काम संस्था विविध कला विकास समिति लंबे समय से करती रही है।...
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इमरजेंसी में जरूरत पड़ने पर नहीं मिलती सहायता
कई जगह थाने और बीट के नंबर भी मिट गए