वार्ड परिसीमन पर उठ रहे सवाल
जिला प्रशासन द्वारा नगर निगम चुनावों को लेकर तय किए गए वार्ड परिसीमन नए वार्ड बनने के बाद स्थिति स्पष्ट है, लेकिन इसके बाद भी भ्रम की स्थिति इसलिए बनी हुई है कि वार्ड की तय की गई नई सीमा को काफी घुमाया गया है। वार्ड 52, 53, 59 और 62 को 2-2 भाग में बांटने के अलावा नए मोहल्ले भी जोड़े गए हैं। इससे नई परिषद के दौरान विकास कार्य को लेकर परेशानी हो सकती है। साथ ही अपने वार्ड को पहचानने में भी लोगों को परेशानी होगी।
उदाहरण के तौर पर वार्ड 62 की जगह बने वार्ड 67-आकाश एवेन्यू, अयोध्या बायपास रोड टनाटन ढाबे से सेक्टर राजीव नगर, कल्पना नगर नाले से अयोध्या बायपास संगम तक। कल्पना नगर नाले से अयोध्या बायपास संगम से बीमा अस्पताल इंद्रपुरी सी सेक्टर रायसेन रोड संगम तक। बीमा अस्पताल सी सेक्टर रायसेन रोड संगम से हजरत निजामुद्दीन 80 फीट रोड से सच्चितानंद नगर रोड संगम तक। इसरो गेट एन सेक्टर झुग्गी बस्ती से खदान अरहड़ी ग्राम नाला तक बनाया गया है। कल्पना नगर राजीव नगर बीमा अस्पताल तक इसमें शामिल है तो लक्ष्मी नगर और रजत नगर के साथ सोनागिरी को अलग कर दिया गया। जबकि यह क्षेत्र बीच में पड़ते हैं। इसी प्रकार वार्ड 68 में खदान ग्राम अरहेड़ी नाले से अयोध्या नगर सेक्टर होते हुए हथाईखेड़ा डेम से श्री राम कैंपस अयोध्या बायपास संगम तक। श्री राम कैंपस अयोध्या बायपास संगम से होते हुए आकाश एवेन्यू होकर राजीव नगर सी सेक्टर, शांति नगर झुग्गी बस्ती सी 1 सच्चितानंद नगर 80 फीट रोड हजरत निजामुद्दीन, अयोध्या नगर जे, के और एन सेक्टर से झुग्गी बस्ती तक के क्षेत्र जोड़े गए हैं। इनके बीच में आने वाले क्षेत्र दूसरे वार्ड में आने से विकास एक साथ कैसे हो सकेगा। इसी प्रकार वार्ड 59 को सुभाष नगर तक ले गए। इसमें भेल दशहरा मैदान से जवाहर स्कूल से होते हुए कस्तूरबा अस्पताल तक का हिस्सा गया। इसी प्रकार वार्ड 53 को रामेश्वरम से होते हुए मिसरोद तक जोड़ दिया गया। इसी प्रकार वार्ड 53 की स्थिति है।
>कुछ वार्ड में प्रॉपर्टी ट्रैक्स की वसूली जीरो होने पर विकास राशि होगी समस्या >वार्ड 52, 53, 59 और 62 के 2-2 भाग होने से परेशानी
परिसीमन के बाद अस्तित्व में आए वार्डों और पुराने वार्डों की सही स्थिति को लेकर अभी लोगों में भ्रम है, क्योंकि जिस प्रकार से सीमा तय की गई है, वह सीधी होकर कहीं से कहीं निकल गई है। परिसीमन के बाद