बेसहारा बच्चों को मदद कर रही संस्था
कादम्बिनीशिक्षा समिति केवल राजधानी नहीं, बल्कि प्रदेश के मूक-बघिर, मानसिक रूप से अविकसित एवं सामान्य बच्चों के बीच चित्रकला के माध्यम से सामाजिक बुराइयों के प्रति जागरुकता उत्पन्न करने की दिशा में कार्यरत है। राष्ट्रीय एकीकरण, पर्यावरण संरक्षण, सांप्रदायिक सामंजस्य, भारतीय संस्कृति परंपरा, साक्षरता, वन्य जीव, ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरुकता विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित कर एवं सृजनात्मक लेखन, नृत्य गायन प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों और युवाओं को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है।
समिति की अध्यक्ष रेखा भटनागर ने बताया कि संस्थान को चित्रों से होने वाली आमदनी बेसहारा बच्चों की शिक्षा आदि पर खर्च की जाती है। बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें हर प्रकार की सहायता समिति द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। सामाजिक, सांस्कृतिक, पर्यावरण, शिक्षा सहित अन्य क्षेत्रों में संस्था सक्रिय है। पर्यावरण दिवस बाल निकेतन में अनाथ बच्चों के बीच मनाया जाता है। यहां के बच्चों ने पर्यावरण विषय पर आकर्षक चित्रों के माध्यम से अपनी कला का प्रदर्शन किया। ऐसे बच्चों को वे आगे बढ़ाने का भरसक प्रयास कर रही हैं।
प्रतिभावानबच्चों को पुरस्कार
बच्चोंको प्रोत्साहित करने के लिए समय-समय पर विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। इनमें विजेताओं को पुरस्कृत किया जाता है। पर्यावरण से जुड़ी कई प्रदर्शनी शहर में लग चुकी हैं।
येप्रयास भी कर रही है संस्था
संस्थामूकबघिर, नि:शक्तजन, माता-पिता से वंचित बच्चों एवं सामान्य बालक-बालिकाओं को भारत देश की कला-संस्कृति के क्षेत्र में आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। पर्यावरण के अलावा भारतीय उत्सव, बिजली-पानी बचाओ आदि विषयों पर केन्द्रित कर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। समिति द्वारा इंटरनेशनल चाइल्ड आर्ट एक्जीबीशन गुडग़ांव में पुरस्कृत प्रदेश के बच्चों को हाल ही में बरखेड़ी क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में पुरस्कृत किया। इस अवसर पर सांसद आलोक संजर ने कहा कि इस तरह के आयोजनों के माध्यम से जल संरक्षण, पर्यावरण, नगरीय स्वच्छता आदि जन समस्याओं के प्रति जन जागरुकता पैदा कर संस्था अहम कार्य कर रही है।
कादम्बिनी शिक्षा समिति पिछले करीब अठारह वर्षों से बच्चों, युवाओं और महिलाओं के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य को लेकर कार्य कर रही है। संस्था बेहसहारा बच